इस जानकारी को छोड़ दें

सैकेंडरी मैन्यू को छोड़ दें

विषय-सूची को छोड़ दें

यहोवा के साक्षी

हिंदी

सजग होइए‍!  |  अंक 3 2016

खाने से एलर्जी होने में और उसे पचा न पाने में क्या फर्क है?

खाने से एलर्जी होने में और उसे पचा न पाने में क्या फर्क है?

एमिली: “खाना खाते-खाते मैंने चम्मच प्लेट में रख दिया। मुझे कुछ अजीब-सा लग रहा था। मेरे मुँह में खुजली होने लगी, जीभ सूज गयी, सिर चकराने लगा और साँस लेने में तकलीफ होने लगी। बाँह और गर्दन पर ददोरे भी पड़ गए। मैं खुद को किसी तरह सँभालने की कोशिश कर रही थी, पर मैं जानती थी कि मुझे फौरन अस्पताल जाना पड़ेगा!”

ज़्यादातर लोग हर तरह के खाने का मज़ा ले पाते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी हैं, जिनके लिए कुछ चीज़ें खाना नुकसानदेह हो सकता है। उन्हें भी एमिली की तरह कुछ चीज़ें खाने से एलर्जी होती है। एमिली को जिस तरह से एलर्जी हुई, उसे ऐनाफलेक्सिस कहा जाता है और यह बहुत खतरनाक एलर्जी होती है। लेकिन अच्छी बात यह है कि खाने से होनेवाली ज़्यादातर एलर्जी इतनी खतरनाक नहीं होती हैं।

हाल के सालों में बहुत-से लोगों को कुछ चीज़ें खाने से एलर्जी होने लगी है या खाना पचाने में मुश्किल होने लगी है। लेकिन कुछ जानकार कहते हैं कि बहुत-से लोगों को लगता तो है कि उन्हें कुछ चीज़ें खाने से एलर्जी है, लेकिन उनमें से बहुत कम ऐसे हैं जिन्होंने इस मामले में डॉक्टरी जाँच करवायी है।

खाने से एलर्जी क्यों होती है?

एक जानी-मानी पत्रिका के मुताबिक किसी को भी ठीक-ठीक नहीं मालूम कि कुछ चीज़ें खाने से एलर्जी क्यों होती है। लेकिन कई जानकारों का मानना है कि हमारे शरीर में बीमारी से लड़ने की जो ताकत है, यानी रोग प्रतिरक्षा प्रणाली ही एलर्जी के लिए ज़िम्मेदार है।

कुछ खाने में ऐसे प्रोटीन होते हैं, जिनकी वजह से कुछ लोगों को एलर्जी हो जाती है। हमारे शरीर को लगता है कि वह प्रोटीन उसे नुकसान पहुँचाएगा। जब ऐसा प्रोटीन हमारे शरीर में आता है, तो हमारा शरीर इसका सामना करने के लिए IgE नाम का एंटीबॉडी (बीमारियों से लड़नेवाला पदार्थ) तैयार करता है। जब अगली बार आप वही प्रोटीनवाला खाना खाते हैं, तो पहले से शरीर में मौजूद एंटीबॉडी अब कुछ रसायन छोड़ते हैं, जिनमें से एक का नाम है हिस्टामिन।

आम तौर पर हिस्टामिन की वजह से हमारा शरीर बीमारियों से अच्छी तरह लड़ पाता है। लेकिन जब IgE एंटीबॉडी और इसके ज़रिए छोड़े गए हिस्टामिन शरीर में एक-साथ होते हैं, तो उस वक्‍त किसी वजह से उन लोगों को एलर्जी हो जाती है, जो खाने में खास तरह के प्रोटीन नहीं ले पाते।

यही वजह है कि कई बार नयी चीज़ खाने से हमें कुछ नहीं होता, लेकिन वही चीज़ दोबारा खाने पर हमें एलर्जी हो जाती है।

हम कुछ खाना क्यों नहीं पचा पाते?

कई बार जब हम खाना नहीं पचा पाते (जिसे अपच कहते हैं), तो हमारे शरीर पर इसका उलटा असर होता है, जैसे एलर्जी में होता है। लेकिन खाने से होनेवाली एलर्जी और अपच में फर्क है। एलर्जी के दौरान शरीर खुद पर ही हमला करने लगता है, लेकिन अपच के दौरान ऐसा नहीं होता। अपच होने पर शरीर में एंटीबॉडी नहीं बनते। उस वक्‍त शरीर में पाचक रस (एन्ज़ाइम) की कमी की वजह से या फिर खाने में जो रसायन होते हैं, उन्हें पचा न पाने की वजह से खाना हज़म नहीं होता। जैसे कुछ लोगों को लैक्टोस इंटॉलरन्स होता है, यानी वे दूध या उससे बनी  चीज़ें नहीं खा पाते हैं। इसकी यह वजह है कि दूध में पाए जानेवाले शक्कर को पचाने के लिए उनके शरीर में उतना पाचक रस नहीं होता।

जैसे हमने पहले देखा था शायद पहली बार कोई चीज़ खाने से एलर्जी न हो, लेकिन अपच पहली बार में ही हो सकता है। कुछ मामलों में यह बात मायने रखती है कि एक व्यक्ति ने कोई चीज़ कितनी खायी है। वही चीज़ अगर थोड़ी ही खायी जाए, तो पचायी जा सकती है, लेकिन ज़्यादा खा ली जाए, तो पचाने में मुश्किल हो सकती है। यह खाने से होनेवाली एलर्जी से अलग है, जिसमें थोड़ा-भी खाने से जान पर बन सकती है।

इनके लक्षण क्या हैं?

एलर्जी के कुछ लक्षण हैं: खुजली होना, उलटी या दस्त होना, जी मचलना, ददोरे पड़ना या फिर गले, आँख या जीभ का सूज जाना। कई बार तबियत ज़्यादा खराब हो सकती है, जैसे ब्लड प्रेशर कम हो सकता है, चक्कर आ सकता है, बेहोश हो सकते हैं या फिर दिल का दौरा भी पड़ सकता है। कई बार बहुत ज़्यादा एलर्जी (ऐनाफलेक्टिक रिएक्शन) होने पर तबियत अचानक से ज़्यादा बिगड़ सकती है और जान भी जा सकती है।

किसी भी तरह के खाने से एलर्जी हो सकती है। लेकिन ज़्यादातर मामलों में एलर्जी कुछ ही तरह के खाने से होती है, जैसे मूँगफली, सोयाबीन, गेहूँ, दूध, अंडे, मछली, काजू -अखरोट जैसे काष्ठ फल या फिर केकड़ा, लॉबस्टर या झींगा जैसे जल-जंतु वगैरह से। एक व्यक्ति को किसी भी उम्र में एलर्जी हो सकती है। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक अगर एक बच्चे के माता-पिता या उनमें से एक को एलर्जी है, तो मुमकिन है कि बच्चे को भी एलर्जी हो जाए। लेकिन बड़े होने पर बहुत-से बच्चों को एलर्जी वही चीज़ खाने से न हो, जिससे उन्हें बचपन में होती थी।

अपच के लक्षण उतने खतरनाक नहीं होते, जितने बहुत ज़्यादा एलर्जी होने पर होते हैं। अपच होने पर पेट में दर्द, मरोड़ या गैस होती है। पेट फूल जाता है, सिरदर्द, थकान या बैचेनी होती है और ददोरे भी पड़ सकते हैं। अपच कई तरह की चीज़ें खाने से हो सकता है। कुछ चीज़ें जिनसे आम तौर पर अपच होता है, वे हैं, दूध से बनी चीज़ें, गेहूँ, ग्लूटन (कुछ तरह के अनाज में पाया जानेवाला प्रोटीन), शराब और खमीर।

जाँच और इलाज

अगर आपको लगता है कि आपको कोई चीज़ खाने से एलर्जी या अपच है, तो किसी डॉक्टर को दिखाना अच्छा होगा। खुद ही अपना इलाज करने से या फिर खुद ही कुछ चीज़ों से परहेज़ करने से आपको नुकसान हो सकता है, क्योंकि इससे शरीर में कुछ विटामिन वगैरह की कमी हो सकती है।

बहुत ज़्यादा एलर्जी होने पर आम तौर पर लोग कुछ तरह के खाने से परहेज़ करते हैं, क्योंकि इसका कोई एक इलाज नहीं है। * लेकिन अगर आपको कोई चीज़ खाने से थोड़ी-बहुत एलर्जी या अपच है, तो उसे बार-बार और ज़्यादा मात्रा में न खाएँ। शायद इससे आपको कुछ राहत मिले। लेकिन कुछ मामलों में लोगों को उस खाने से पूरी तरह परहेज़ करना पड़ता है या फिर कुछ समय तक वे उसे नहीं खाते। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उन्हें किस हद तक उस खाने से एलर्जी या अपच है।

अगर आपको एलर्जी या अपच है, तो हिम्मत मत हारिए। आप ही की तरह दुनिया-भर में कई लोग हैं, लेकिन वे अपनी तबियत का अच्छी तरह खयाल रख पा रहे हैं और कई तरह के पौष्टिक और स्वादिष्ट खाने का मज़ा भी ले पा रहे हैं। आप भी ऐसा कर सकते हैं! ▪ (g16-E No. 3)

^ पैरा. 19 डॉक्टरों का कहना है कि जिन्हें बहुत ज़्यादा एलर्जी है, वे अपने साथ एक खास तरह की पेनवाली सुई रखें, जिसमें एड्रीनलिन (एपिनेफ्रीन) हो। इस तरह जब अचानक से बहुत ज़्यादा एलर्जी हो जाए, तो वे तुरंत राहत पाने के लिए अपने पास रखी इस सुई का इस्तेमाल कर सकते हैं। कुछ डॉक्टरों का यह भी सुझाव है कि जिन बच्चों को एलर्जी है, वे कोई ऐसी चीज़ पहनें या रखें, जैसे कार्ड वगैरह। इससे उनके टीचर या उनका ध्यान रखनेवालों को उनकी एलर्जी के बारे में पता चलेगा।