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यहोवा के साक्षी

हिंदी

सजग होइए‍!  |  अंक 2 2016

 दुनिया पर एक नज़र

एक नज़र आपसी रिश्तों पर

एक नज़र आपसी रिश्तों पर

जब आपसी रिश्तों की बात आती है, तो आप सबसे पहले किसके पास जाकर सलाह लेने की सोचते हैं? क्या आप जानते हैं कि पवित्र किताब बाइबल में इस बारे में बताया गया है? जानिए कि आपसी रिश्तों पर किए गए अध्ययन कैसे सदियों पहले शास्त्र में दी सलाह को सही साबित करते हैं।

भारत

2014 में किए गए एक सर्वे के मुताबिक 18-25 साल की उम्र के 61 प्रतिशत नौजवानों का मानना है कि शादी से पहले संबंध रखना “आज भारत में कोई बड़ी बात नहीं है।” मुंबई के एक डॉक्टर ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि “आजकल नौजवान शादी के बारे में सोचकर किसी के साथ रिश्ता नहीं रखते। चाहे यह सिर्फ किसी के साथ एक रात बिताने की बात हो, हर दूसरे दिन रात गुज़ारने की या फिर साथ रहने की, उनके दिमाग में उस व्यक्‍ति से शादी करने का खयाल तक नहीं आता।”

ज़रा सोचिए: यौन संबंध से होनेवाली बीमारियाँ या दिलों का टूटना, क्या ऐसी बातें शादी से पहले संबंध रखने पर ज़्यादा होती हैं या फिर शादी के बाद अपने साथी के साथ संबंध रखने पर?—1 कुरिंथियों 6:18.

डेनमार्क

एक सर्वे के मुताबिक अपने परिवार के सदस्यों के साथ बात-बात पर बहस करने से 35-50 की उम्र के लोगों की मौत की गुंजाइश दुगनी हो जाती है। कोपनहेगन यूनिवर्सिटी ने 11 साल तक इस उम्र के 10,000 लोगों पर यह सर्वे किया। इस सर्वे में यह निकलकर आया है कि जो लोग अपने परिवार के सदस्यों से ज़्यादा बहस करते हैं, उनकी वक्‍त से पहले मौत होने की गुंजाइश ज़्यादा होती है; जबकि जो ऐसा नहीं करते, वे ज़्यादा समय तक जीते हैं। इस बारे में बताते वक्‍त एक लेखिका ने कहा कि अगर बहस करने के बजाय झगड़ों को निपटाया जाए, तो शायद उनकी “वक्‍त से पहले मौत न हो।”

पवित्र शास्त्र में लिखा है: “जो सम्भलकर बोलता है, वही ज्ञानी ठहरता है, और जिसकी आत्मा शान्त रहती है, वही समझवाला पुरुष ठहरता है।” —नीतिवचन 17:27.

अमरीका

हाल ही में लुईज़ियाना राज्य में 564 नए शादीशुदा जोड़ों पर किए गए सर्वे के मुताबिक जो लोग शादी से पहले की मुलाकातों के दौरान रिश्ता तोड़ते-जोड़ते रहते हैं, मुमकिन है कि वे शादी के पहले पाँच सालों में ही यह फैसला कर लें कि वे कुछ वक्‍त के लिए एक-दूसरे से अलग रहेंगे। उनमें झगड़े होने और शादीशुदा ज़िंदगी से नाखुश होने की गुंजाइश भी ज़्यादा होती है।

पवित्र शास्त्र में लिखा है: “जिसे परमेश्वर ने [शादी के] एक बंधन में बाँधा है, उसे कोई इंसान अलग न करे।”—मत्ती 19:6. (g16-E No.2)