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यहोवा के साक्षी

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सजग होइए‍!  |  अंक 2 2016

 परिवार के लिए मदद | नौजवान

पक्के दोस्त कैसे बनाएँ?

पक्के दोस्त कैसे बनाएँ?

चुनौती

आज की तकनीकी दुनिया के बारे में क्या कहें, जितनी भी तारीफ करें, शायद कम पड़े। इसकी वजह से आज हम पहले के मुकाबले लोगों से बहुत आसानी से बात कर पाते हैं। फिर भी आज लोगों का आपसी रिश्ता शायद उतना गहरा नहीं होता, जितना पहले होता था। इस बारे में एक लड़के का कहना है, “मेरी दोस्ती बहुत दिनों तक टिक नहीं पाती। पर वहीं, मेरे पापा अपने दोस्तों से बहुत करीब हैं और उनकी दोस्ती सालों से चल रही है।”

आज क्यों इस तरह की दोस्ती देखने को नहीं मिलती?

आपको क्या मालूम होना चाहिए?

कुछ हद तक तकनीकी चीज़ें इसके लिए ज़िम्मेदार हैं। आज फोन पर एक-दूसरे को मैसेज भेजना, ऐसी वेबसाइट पर जाना जहाँ पर दोस्त बनाए जा सकते हैं या खुलेआम अपनी राय बतायी जा सकती है, बहुत आम हो गया है। इस वजह से आज लोगों से दोस्ती बनाए रखने के लिए उनसे मिलना ज़रूरी नहीं है। आजकल लोग एक-के-बाद-एक मैसेज तो भेजते रहते हैं या ट्‌वीट तो करते हैं, पर उनकी बातचीत में वह मज़ा नहीं, न ही वह गहराई है, जो पहले लोगों की बातचीत में हुआ करती थी। आर्टिफिशियल मैच्योरिटी नाम की किताब का कहना है, “आज बहुत कम ऐसा होता है कि लोग एक-दूसरे से मिलकर बातचीत करें। बच्चे भी आज आमने-सामने बैठकर उतनी बातचीत नहीं करते, जितनी वे मोबाइल-कंप्यूटर के सामने बैठकर करते हैं।”

कुछ मामलों में इंटरनेट और फोन पर दोस्तों से बात करने से हमें ऐसा लग सकता है कि हमारी दोस्ती बहुत पक्की है, पर शायद हकीकत कुछ और हो। बाईस साल का बॉबी * कहता है, “हाल ही में मुझे लगा कि हर बार मैं ही अपने दोस्तों को मैसेज भेजता रहता हूँ। फिर एक दिन मैंने सोचा कि क्यों न देखूँ कि कौन असल में मुझसे बात करना चाहता है, इसलिए मैंने कुछ दिन के लिए मैसेज भेजना बंद कर दिया। लेकिन इसके बाद सिर्फ कुछ ही दोस्तों ने मुझे मैसेज भेजा। तब जाकर मुझे समझ में आया कि जिन्हें मैं अपना पक्का दोस्त मानता था, वह असल में सिर्फ दोस्त थे, पक्के दोस्त नहीं।”

क्या आज मोबाइल और इंटरनेट की वजह से लोगों की दोस्ती पक्की नहीं हो गयी है, क्योंकि इनके ज़रिए वे आसानी से एक-दूसरे से बातचीत कर पाते हैं? हाँ, ज़रूर, लेकिन तभी जब वे इंटरनेट के अलावा भी अपने दोस्तों से आमने-सामने बैठकर बातचीत करें। इंटरनेट या फोन दो लोगों के बीच एक पुल तो बाँध देता है, लेकिन उन्हें करीब नहीं ले आता।

 आप क्या कर सकते हैं?

पक्की दोस्ती की पहचान कीजिए। पवित्र शास्त्र में बताया है कि एक पक्का दोस्त भाई से भी बढ़कर होता है। (नीतिवचन 18:24) क्या आप चाहते हैं कि आपका भी ऐसा ही एक दोस्त हो? क्या आप खुद ऐसे दोस्त हैं? इन सवालों का जवाब पाने के लिए ऐसी तीन बातें लिखिए, जो आप चाहते हैं कि आपके दोस्त में हों। फिर ऐसी तीन बातें लिखिए, जो आपमें होनी चाहिए। खुद से पूछिए, ‘जिनसे मैं इंटरनेट पर बातचीत करता हूँ, उनमें से कौन वैसा है? और उन्हें मेरी कौन-सी बात अच्छी लगती है?’—पवित्र शास्त्र से सलाह: फिलिप्पियों 2:4.

सोचिए कि क्या बातें मायने रखती हैं। हम इंटरनेट पर अकसर उन्हीं के साथ दोस्ती करते हैं, जिनकी दिलचस्पी या शौक हमारी तरह होते हैं। लेकिन एक जैसी बातों में दिलचस्पी रखने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है, एक जैसे उसूल होना। इक्कीस साल की लतिका कहती है, “मेरे बहुत सारे दोस्त नहीं हैं, लेकिन जो हैं, उनके साथ रहकर मेरा मन करता है कि मैं अच्छे काम करूँ।”—पवित्र शास्त्र से सलाह: नीतिवचन 13:20.

मिलकर बातचीत कीजिए। आमने-सामने बात करने में जो मज़ा है, वह इंटरनेट पर नहीं है। मिलकर बातचीत करने पर आप अपने दोस्त को देख पाते हैं और उसके लहज़े को और हाव-भाव को और भी अच्छी तरह समझ पाते हैं।—पवित्र शास्त्र से सलाह: 1 थिस्सलुनीकियों 2:17.

चिट्ठी लिखिए। आज चिट्ठी लिखना पुराने ज़माने की बात मानी जाती है। लोग इतने व्यस्त हैं कि एक ही वक्‍त पर बहुत-से काम करते हैं, तो ऐसे में शायद ही कोई किसी को चिट्ठी लिखे। लेकिन अगर आप ऐसा करें, तो आपके दोस्तों को बहुत अच्छा लगेगा। वे इस बात की कदर करेंगे कि आपने उनके लिए इतना सोचा। शेरी टरकल नाम की लेखिका ने अपने किताब में एक लड़के के बारे में बताया कि उसे किसी ने कभी कोई चिट्ठी नहीं लिखी थी। उस लड़के का कहना है कि काश वह उस ज़माने में पैदा हुआ होता, जब लोग चिट्ठियाँ लिखा करते थे। तो क्यों न आप भी पक्के दोस्त बनाने के लिए यह पुराना तरीका आज़माकर देखें?

सौ बात की एक बात: पक्के दोस्त सिर्फ हाल-चाल जानने के लिए ही बातचीत नहीं करते। वे एक-दूसरे से प्यार करते हैं, उन्हें एक-दूसरे के लिए हमदर्दी होती है, वे सब्र से पेश आते हैं और एक-दूसरे को माफ करते हैं। जब वे ऐसा करते हैं, तो उनकी दोस्ती पक्की हो जाती है। इंटरनेट पर इस तरह की दोस्ती नहीं बनायी जा सकती। ▪ (g16-E No.1)

^ पैरा. 8 इस लेख में कुछ नाम बदल दिए गए हैं।