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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग—अध्ययन संस्करण फरवरी 2017

इस अंक में 3-30 अप्रैल, 2017 के लिए अध्ययन लेख दिए गए हैं।

यहोवा का मकसद ज़रूर पूरा होगा!

धरती और इंसानों के बारे में परमेश्वर का क्या मकसद है? क्या गड़बड़ी पैदा हुई? यह क्यों कहा जा सकता है कि यीशु के फिरौती बलिदान से वह रास्ता खुला जिससे परमेश्वर का मकसद पूरा होगा?

फिरौती—पिता की तरफ से एक “उत्तम देन”

परमेश्वर के इस इंतज़ाम से हमें न सिर्फ बढ़िया आशीषें मिलेंगी बल्कि कुछ ज़रूरी मसले भी सुलझाए जाएँगे जो स्वर्ग और धरती पर जीनेवाले परमेश्वर के सभी सेवकों के लिए बहुत मायने रखते हैं।

जीवन कहानी

परमेश्वर ने हम पर कई तरीकों से महा-कृपा की

डगलस और मैरी गेस्ट का मानना है कि कनाडा में पायनियर सेवा करते और ब्राज़ील और पुर्तगाल में मिशनरी सेवा करते वक्‍त परमेश्वर ने कई तरीकों से उन पर महा-कृपा की।

यहोवा अपने लोगों की अगुवाई करता है

पुराने ज़माने में यहोवा ने अपने लोगों की अगुवाई करने के लिए इंसानों को चुना। क्या सबूत दिखाते हैं कि असल में यहोवा अगुवाई कर रहा था?

आज कौन परमेश्वर के लोगों की अगुवाई कर रहा है?

यीशु ने वादा किया था कि वह दुनिया की व्यवस्था के आखिरी वक्‍त तक अपने चेलों के साथ रहेगा। आज यीशु किस तरह धरती पर परमेश्वर के लोगों की अगुवाई कर रहा है?

आपने पूछा

प्रेषित पौलुस ने लिखा कि परमेश्वर “तुम्हें ऐसी किसी भी परीक्षा में नहीं पड़ने देगा जो तुम्हारी बरदाश्त के बाहर हो।” तो क्या इसका मतलब है कि यहोवा पहले से जान लेता है कि हम क्या बरदाश्त कर सकते हैं और फिर तय करता है कि कौन-सी परीक्षाएँ हम पर आएँगी?

अतीत के झरोखे से

“कोई भी रास्ता मुश्किल नहीं, कोई भी मंज़िल दूर नहीं”

सन्‌ 1920 के दशक के आखिरी सालों में और 1930 के दशक के शुरूआती सालों में जोशीले पायनियरों ने ऑस्ट्रेलिया के अंदरूनी इलाकों में परमेश्वर के राज की खुशखबरी सुनाने की ठान ली।