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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग—अध्ययन संस्करण  |  नवंबर 2016

क्या आप यहोवा की किताब की दिल से कदर करते हैं?

क्या आप यहोवा की किताब की दिल से कदर करते हैं?

‘जब तुमने परमेश्वर का वचन सुना तो इसे परमेश्वर का वचन समझकर स्वीकार किया, जो यह सचमुच है।’—1 थिस्स. 2:13.

गीत: 37, 48

1-3. (क) यूओदिया और सुन्तुखे के बीच समस्या कैसे शुरू हुई होगी? (ख) इस तरह की समस्याओं को बढ़ने से पहले कैसे रोका जा सकता है? (लेख की शुरूआत में दी तसवीर देखिए।)

यहोवा के सेवक उसकी पवित्र किताब बाइबल की बहुत कदर करते हैं। हम सब गलतियाँ करते हैं इसलिए समय-समय पर हमें बाइबल से सलाह दी जाती है। जब हमें कोई सलाह दी जाती है तो हम कैसा रवैया दिखाते हैं? पहली सदी की दो मसीही बहनें, यूओदिया और सुन्तुखे की मिसाल लीजिए। इन अभिषिक्‍त बहनों के बीच एक गंभीर समस्या उठी थी। वह समस्या क्या थी, बाइबल नहीं बताती। मगर उदाहरण के लिए सोचिए कि उनके बीच यह समस्या कैसे शुरू हुई होगी।

2 यूओदिया कुछ भाई-बहनों को अपने घर खाने पर बुलाती है। लेकिन सुन्तुखे को नहीं बुलाया जाता है। सुन्तुखे को पता चलता है कि भाई-बहनों ने यूओदिया के घर अच्छा समय बिताया। सुन्तुखे ने शायद मन-ही-मन कहा होगा, ‘ये क्या! यूओदिया ने मुझे नहीं बुलाया। मैं तो सोचती थी कि वह मेरी अच्छी दोस्त है!’ उसे लगता है कि यूओदिया उसे पसंद नहीं करती और इस वजह से उसे अपने यहाँ नहीं बुलाया। फिर सुन्तुखे भी अपने घर एक दावत रखती है और उन्हीं भाई-बहनों को बुलाती है मगर यूओदिया को नहीं बुलाती। इन दोनों बहनों के  बीच जो समस्या पैदा हुई, उससे पूरी मंडली की शांति भंग हो सकती थी। बाइबल नहीं बताती कि आखिर में क्या हुआ, मगर इन दोनों बहनों ने शायद प्रेषित पौलुस की प्यार-भरी सलाह मानी होगी।—फिलि. 4:2, 3.

3 कभी-कभी इसी तरह यहोवा के लोगों के बीच समस्याएँ खड़ी हो सकती हैं। लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल में दी सलाह मानने से इन समस्याओं को सुलझाया जा सकता है या फिर इन्हें बढ़ने से पहले ही रोका जा सकता है। अगर हम यहोवा की दी किताब की दिल से कदर करते हैं तो हम बेशक इसमें दी हिदायतें मानेंगे।—भज. 27:11.

बाइबल हमें अपनी भावनाओं को काबू में रखना सिखाती है

4, 5. अपनी भावनाओं पर काबू करने के बारे में परमेश्वर के वचन में क्या सलाह दी गयी है?

4 जब हमें लगता है कि हमारा अपमान किया गया है या हमारे साथ बुरा सलूक किया गया है तब अपनी भावनाओं पर काबू करना इतना आसान नहीं होता। और अगर हमारे रंग-रूप, देश या जाति, या फिर किसी और बात को लेकर हमारे साथ बुरा व्यवहार किया जाता है तो हमें बहुत दुख होता है। मगर इससे भी ज़्यादा दुख तब होता है जब कोई मसीही भाई-बहन हमारे साथ ऐसा बुरा व्यवहार करता है। ऐसे में क्या परमेश्वर के वचन में दी सलाह हमारी मदद कर सकती है?

5 यहोवा जानता है कि जब इंसान अपनी भावनाओं को काबू में नहीं रखते, तो क्या हो सकता है। ठेस पहुँचने या गुस्सा होने पर हम कुछ ऐसा कह देते हैं या कर देते हैं जिसका बाद में हमें पछतावा होता है। लेकिन यहोवा अपनी किताब में हमसे कहता है, “अपने मन में उतावली से क्रोधित न हो।” ज़रा सोचिए, अगर हम इस सलाह पर चलें और जल्दी बुरा न मानें तो हम कितनी मुश्किलों से बच सकते हैं! (सभोपदेशक 7:9; नीतिवचन 16:32 पढ़िए।) बाइबल यह भी बताती है कि हम दिल खोलकर दूसरों को माफ करें। दरअसल यीशु ने कहा कि अगर हम दूसरों को माफ न करें तो यहोवा भी हमें माफ नहीं करेगा। (मत्ती 6:14, 15) क्या आपको लगता है कि आपको और भी बढ़कर दूसरों को माफ करना चाहिए और अपनी भावनाओं पर काबू रखना चाहिए?

6. हमें क्यों सावधान रहना चाहिए कि हम कड़वाहट से न भर जाएँ?

6 जो इंसान अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रखता, वह अकसर कड़वाहट से भर जाता है। इसकी वजह से लोग उससे दूर रहते हैं। उसके रवैए से मंडली के भाई-बहनों पर बुरा असर हो सकता है। ऐसा इंसान शायद अपनी कड़वाहट, यहाँ तक कि दिल में भरी नफरत छिपाने की कोशिश करे, लेकिन जो उसके मन में भरा है वह ‘सभा के बीच प्रगट हो जाएगा।’ (नीति. 26:24-26) प्राचीन शायद ऐसे व्यक्‍ति को समझाने की कोशिश करें कि परमेश्वर के संगठन में कड़वाहट, नफरत और दुश्मनी के लिए कोई जगह नहीं। यही बात यहोवा की अनमोल किताब में भी साफ-साफ बतायी गयी है। (लैव्य. 19:17, 18; रोमि. 3:11-18) क्या आप इस बात से सहमत नहीं?

याद रखिए कि यहोवा हमारी अगुवाई कैसे करता है

7, 8. (क) यहोवा के संगठन का जो हिस्सा धरती पर है, उसकी अगुवाई वह कैसे कर रहा है? (ख) परमेश्वर के वचन में दिए कुछ निर्देश क्या हैं और हमें क्यों उन्हें मानना चाहिए?

7 यहोवा के संगठन का जो हिस्सा धरती पर है उसकी अगुवाई करने और अपने लोगों को आध्यात्मिक भोजन देने के लिए यहोवा ‘विश्वासयोग्य और सूझ-बूझ से काम लेनेवाले दास’ का इस्तेमाल करता है। यह दास, मसीह की निगरानी में काम करता है जो “मंडली का सिर है।” (मत्ती 24:45-47; इफि. 5:23) पहली सदी के शासी निकाय की तरह, यह दास मानता है कि परमेश्वर का वचन उसकी प्रेरणा से लिखा है और इसकी बहुत कदर करता है। (1 थिस्सलुनीकियों 2:13 पढ़िए।) बाइबल में ऐसे क्या निर्देश दिए गए हैं जिनसे हमें फायदा होता है?

8 बाइबल में यह निर्देश दिया गया है कि हम लगातार सभाओं में हाज़िर हों। (इब्रा. 10:24, 25) यह हमें बढ़ावा देती है कि हमारी शिक्षाओं में एकता  हो। (1 कुरिं. 1:10) परमेश्वर का वचन बताता है कि हम उसके राज को अपनी ज़िंदगी में पहली जगह दें। (मत्ती 6:33) इसमें ज़ोर दिया गया है कि घर-घर प्रचार करना, सरेआम गवाही देना और मौका मिलने पर खुशखबरी सुनाना न सिर्फ हमारी ज़िम्मेदारी है बल्कि एक सम्मान भी है। (मत्ती 28:19, 20; प्रेषि. 5:42; 17:17; 20:20) परमेश्वर की किताब मसीही प्राचीनों को हिदायत देती है कि वे उसके संगठन को शुद्ध रखें। (1 कुरिं. 5:1-5, 13; 1 तीमु. 5:19-21) यहोवा आदेश देता है कि उसके संगठन के सभी लोगों को शारीरिक शुद्धता और उपासना में शुद्धता रखनी चाहिए।—2 कुरिं. 7:1.

9. परमेश्वर के वचन की समझ देने के लिए यीशु ने कौन-सा ज़रिया ठहराया है?

9 कुछ लोगों को लगता है कि वे बाइबल को अपने तरीके से समझ सकते हैं, उन्हें किसी की ज़रूरत नहीं। लेकिन यीशु ने आध्यात्मिक भोजन देने के लिए सिर्फ एक ही ज़रिया ठहराया है और वह है ‘विश्वासयोग्य दास।’ महिमा से भरपूर यीशु मसीह सन्‌ 1919 से इसी दास का इस्तेमाल कर रहा है ताकि उसके चेले परमेश्वर की किताब में लिखी बातों को समझ सकें और उन्हें मान सकें। जब हम बाइबल की हिदायतें मानते हैं तो हम मंडली में शुद्धता, शांति और एकता को बढ़ावा दे रहे होते हैं। हममें से हरेक को खुद से पूछना चाहिए, ‘आज यीशु जिस दास का इस्तेमाल कर रहा है, क्या मैं उस दास को पूरी वफादारी से सहयोग दे रहा हूँ?’

यहोवा का रथ बड़ी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है!

10. यहेजकेल की किताब में यहोवा के संगठन के स्वर्गीय हिस्से को कैसे दर्शाया गया है?

10 परमेश्वर के वचन से हमें यहोवा के संगठन के स्वर्गीय हिस्से के बारे में भी जानकारी मिलती है। उदाहरण के लिए, भविष्यवक्ता यहेजकेल को एक दर्शन दिया गया था, जिसमें संगठन के इस हिस्से को स्वर्गीय रथ से दर्शाया गया है। (यहे. 1:4-28) यहोवा उस रथ पर सवार है और जहाँ कहीं उसकी पवित्र शक्‍ति उस रथ को जाने के लिए उभारती है वह वहीं जाता है। यहोवा के संगठन का जो हिस्सा धरती पर है वह भी इसी स्वर्गीय रथ के मुताबिक चलता है। यह रथ बड़ी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है! ज़रा सोचिए कि पिछले 10 सालों के दौरान संगठन में कितने बदलाव हुए हैं! इन सभी बदलावों के पीछे यहोवा का हाथ है। जल्द ही मसीह अपने पवित्र स्वर्गदूतों के साथ आएगा और इस दुष्ट दुनिया को मिटा देगा। फिर ऐसा कोई नहीं होगा जो यहोवा और उसके नाम का अपमान करे और उसके हुकूमत करने के तरीके पर उँगली उठाए।

हम उन स्वयंसेवकों के कितने शुक्रगुज़ार हैं जो अलग-अलग निर्माण कामों में लगे हुए हैं! (पैराग्राफ 11 देखिए)

11, 12. यहोवा का संगठन किन कामों में लगा हुआ है?

11 यहोवा के संगठन का जो हिस्सा धरती पर है वह इन आखिरी दिनों में जो काम कर रहा है उस पर गौर कीजिए। निर्माण काम। न्यू यॉर्क राज्य के वॉरविक में यहोवा के साक्षियों के नए मुख्यालय को बनाने में सैकड़ों भाई-बहन लगे हुए हैं। विश्वव्यापी योजना और निर्माण विभाग की निगरानी में हज़ारों स्वयंसेवक नए राज-घर बनाने और शाखा दफ्तरों के लिए नयी इमारतें खड़ी करने में खूब मेहनत कर रहे हैं। हम इन भाई-बहनों के कितने शुक्रगुज़ार हैं जो खुशी-खुशी इन अलग-अलग निर्माण कामों में लगे हुए हैं! दुनिया-भर के उन राज प्रचारकों को भी यहोवा  आशीष दे रहा है जो दान देकर इन कामों में सहयोग देते हैं।—लूका 21:1-4.

12 शिक्षा। ज़रा उन अलग-अलग स्कूलों के बारे में सोचिए जिनमें हम परमेश्वर से सिखाए जाते हैं। (यशा. 2:2, 3) मिसाल के लिए, पायनियर सेवा स्कूल, राज प्रचारकों के लिए स्कूल, गिलियड स्कूल, बेथेल के नए सदस्यों के लिए स्कूल, सर्किट निगरानों और उनकी पत्नियों के लिए स्कूल, मंडली के प्राचीनों के लिए स्कूल, राज-सेवा स्कूल और शाखा-समिति के सदस्यों और उनकी पत्नियों के लिए स्कूल। वाकई, यहोवा अपने लोगों को कितने अच्छे तरीके से सिखा रहा है। हमारी वेबसाइट jw.org पर भी बाइबल की शिक्षा दी जाती है। इस पर सैकड़ों भाषाओं में हमारे प्रकाशन उपलब्ध हैं। इतना ही नहीं, बच्चों और परिवारों के लिए भी जानकारी दी गयी है। और हाँ, इस पर हमारे बारे में खबरें भी दी जाती हैं। क्या आप प्रचार में और पारिवारिक उपासना में jw.org वेबसाइट का इस्तेमाल कर रहे हैं?

यहोवा के वफादार रहिए और उसके संगठन को सहयोग दीजिए

13. यहोवा के वफादार सेवक होने के नाते हम पर क्या ज़िम्मेदारी आती है?

13 यहोवा के संगठन का हिस्सा होना हमारे लिए क्या ही सम्मान की बात है! जब हमने सीखा कि परमेश्वर हमसे क्या चाहता है और उसके स्तर क्या हैं तो हम पर यह ज़िम्मेदारी आती है कि हम वही करें जो सही है और उसकी हुकूमत को बुलंद करें। जैसे-जैसे इस दुनिया में लोग बदचलनी के दलदल में धँसते जा रहे हैं, हमें और भी ज़्यादा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम ‘बुराई से घृणा’ करें जैसे यहोवा करता है। (भज. 97:10) हम ऐसे भक्‍तिहीन लोगों की तरह नहीं बनना चाहते जो “बुरे को भला और भले को बुरा” कहते हैं। (यशा. 5:20) हम परमेश्वर को खुश करना चाहते हैं इसलिए हम शारीरिक, नैतिक और उपासना के मामले में शुद्ध बने रहने की जी-तोड़ कोशिश करते हैं। (1 कुरिं. 6:9-11) हम यहोवा से प्यार करते हैं और उस पर भरोसा रखते हैं। हम परमेश्वर की अनमोल किताब में दिए स्तरों पर चलकर दिखाते हैं कि हम हर हाल में उसके वफादार रहना चाहते हैं, फिर चाहे हम घर पर हों, काम की जगह पर, मंडली में या स्कूल में हों। (नीति. 15:3) आइए देखें कि हम और किन तरीकों से दिखा सकते हैं कि हम परमेश्वर के वफादार हैं।

14. मसीही माता-पिता कैसे दिखा सकते हैं कि वे यहोवा के वफादार हैं?

14 बच्चों की परवरिश। मसीही माता-पिता परमेश्वर के वचन के मुताबिक अपने बच्चों की परवरिश करते हैं और इस तरह दिखाते हैं कि वे यहोवा के वफादार हैं। बच्चों की परवरिश के बारे में उनकी संस्कृति क्या कहती है, यह बात उतनी मायने नहीं रखती जितनी कि परमेश्वर इस बारे में क्या कहता है। मसीही घरों में दुनिया की फितरत के लिए कोई जगह नहीं। (इफि. 2:2) एक मसीही पिता कभी यह नहीं सोचेगा, ‘हमारे देश में तो औरतें ही बच्चों को सिखाती हैं।’ बाइबल इस बारे में साफ-साफ बताती है, “हे पिताओ, अपने बच्चों को . . . यहोवा की तरफ से आनेवाला अनुशासन देते हुए और उसी की सोच के मुताबिक उनके मन को ढालते हुए उनकी परवरिश करो।” (इफि. 6:4) परमेश्वर का डर माननेवाले माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे शमूएल की तरह हों जिसके बारे में लिखा है कि जब वह बड़ा हो रहा था तो यहोवा उसके संग था।—1 शमू. 3:19.

15. ज़िंदगी में बड़े-बड़े फैसले करते वक्‍त हम कैसे दिखा सकते हैं कि हम यहोवा के वफादार हैं?

15 फैसले करना। ज़िंदगी में बड़े-बड़े फैसले करते वक्‍त जब हम परमेश्वर के वचन और उसके संगठन से मार्गदर्शन लेते हैं तो हम दिखाते हैं कि हम परमेश्वर के वफादार हैं। ऐसा करना क्यों ज़रूरी है इसके लिए आइए हम एक नाज़ुक मसले पर ध्यान दें। विदेश जाकर नौकरी करनेवाले कुछ पति-पत्नी के जब कोई बच्चा होता है तो वे उसे रिश्तेदारों के पास अपने देश भेज देते हैं ताकि वहाँ उसकी परवरिश हो सके। वे ऐसा इसलिए करते हैं ताकि वे विदेश में रहकर ही पैसा कमा सकें। माना कि ऐसा करना उनका निजी फैसला है, लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए कि उन्हें अपने फैसलों के लिए परमेश्वर को जवाब देना होगा। (रोमियों 14:12 पढ़िए।) अपने परिवार और अपना  गुज़ारा करने के बारे में कोई भी फैसला करने से पहले क्या यह बुद्धिमानी नहीं होगी कि हम बाइबल की सलाह पर ध्यान दें? बिलकुल होगी। हमें स्वर्ग में रहनेवाले अपने पिता के मार्गदर्शन की ज़रूरत है क्योंकि हम अपने कदमों को राह नहीं दिखा सकते।—यिर्म. 10:23.

16. (क) एक औरत ने जब बच्चे को जन्म दिया तो उसे क्या फैसला करना था? (ख) सही फैसला करने में किस बात ने उसकी मदद की?

16 विदेश में रहते वक्‍त एक औरत ने एक लड़के को जन्म दिया। वह अपने बच्चे को दादा-दादी के पास अपने देश भेजनेवाली थी। उसी दौरान वह यहोवा की एक साक्षी के साथ बाइबल अध्ययन करने लगी। उस औरत ने अच्छी तरक्की की और सीखा कि परमेश्वर ने उसे यह ज़िम्मेदारी दी है कि वह अपने बच्चे की परवरिश करे और उसे परमेश्वर के बारे में सिखाए। (भज. 127:3; नीति. 22:6) उस औरत ने यहोवा से गिड़गिड़ाकर प्रार्थना की, ठीक जैसा बाइबल बढ़ावा देती है। (भज. 62:7, 8) उसने अपनी बाइबल शिक्षक को भी इस बारे में खुलकर बताया और मंडली के दूसरे भाई-बहनों से भी बात की। दोस्तों और रिश्तेदारों ने उस पर दबाव डाला कि वह बच्चे को उसके दादा-दादी के पास भेज दे। लेकिन उसने फैसला किया कि वह ऐसा नहीं करेगी। जब उसके पति ने देखा कि मंडली के भाई-बहनों ने किस तरह उसकी पत्नी और बच्चे की मदद की तो उस पर इतना अच्छा असर हुआ कि वह बाइबल अध्ययन करने लगा। और वह अपनी पत्नी और बच्चे के साथ सभाओं में आने लगा। ज़रा सोचिए, इस माँ को कितनी खुशी हुई होगी जब उसने देखा कि यहोवा ने उसकी प्रार्थना का जवाब दिया है।

17. बाइबल अध्ययन कराने के बारे में क्या सुझाव दिए गए हैं?

17 निर्देश मानना। परमेश्वर के लिए अपनी वफादारी का सबूत देने का एक अहम तरीका है, संगठन से मिलनेवाले निर्देशों को मानना। जब हम किसी के साथ बाइबल असल में क्या सिखाती है? किताब से अध्ययन शुरू करते हैं, तो गौर कीजिए कि हमें क्या सुझाव दिए गए हैं। एक यह कि हमें हर बार अध्ययन के बाद थोड़ा वक्‍त लेकर विद्यार्थी को संगठन के बारे में बताना चाहिए। हम यह कैसे कर सकते हैं? हम उन्हें राज-घरों में क्या होता है? वीडियो दिखा सकते हैं और आज कौन यहोवा की मरज़ी पूरी कर रहे हैं? ब्रोशर से संगठन के बारे में कुछ सिखा सकते हैं। इसके अलावा, यह सुझाव भी दिया गया है कि तरक्की करनेवाले बाइबल विद्यार्थी के साथ बाइबल सिखाती है किताब खत्म करने के बाद, खुद को परमेश्वर के प्यार के लायक बनाए रखो किताब से अध्ययन करें, फिर चाहे उस वक्‍त तक विद्यार्थी ने बपतिस्मा क्यों न ले लिया हो। संगठन ने ये निर्देश इसलिए दिए हैं ताकि नए चेले “विश्वास में मज़बूती पाते” रहें। (कुलु. 2:7) क्या आप यहोवा के संगठन से मिलनेवाले इन सुझावों को मान रहे हैं?

18, 19. यहोवा का धन्यवाद करने की हमारे पास क्या वजह हैं?

18 यहोवा का धन्यवाद करने की हमारे पास कई वजह हैं! हमारी ज़िंदगी उसी की देन है क्योंकि उसी की वजह से हम चलते-फिरते हैं और वजूद में हैं। (प्रेषि. 17:27, 28) उसने हमें एक बहुत ही अनमोल तोहफा दिया है, वह है उसकी अपनी किताब, बाइबल। ठीक जिस तरह थिस्सलुनीके के मसीही, शास्त्र को परमेश्वर का वचन समझकर उसमें लिखी बातों को मानते थे, उसी तरह हम भी बाइबल को परमेश्वर का दिया संदेश मानते हैं।—1 थिस्स. 2:13.

19 यहोवा के लिखित वचन से हम उसके करीब आए हैं और वह हमारे करीब आया है। (याकू. 4:8) स्वर्ग में रहनेवाले हमारे पिता ने हमें उसके संगठन का हिस्सा बनने का बड़ा सम्मान दिया है। हम इस सम्मान की बहुत कदर करते हैं! हम भजन के उस लेखक की तरह महसूस करते हैं जिसने कहा, “यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करुणा [या “वफादारी,” एन.डब्ल्यू.] सदा की है।” (भज. 136:1) उसने भजन 136 में 26 बार कहा “उसकी वफादारी सदा की है।” यहोवा और उसके संगठन के वफादार रहकर हम भजन में लिखे इन शब्दों को सच होते देखेंगे क्योंकि हम हमेशा के लिए जीएँगे।