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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग—अध्ययन संस्करण  |  जून 2017

क्या आपको याद है?

क्या आपको याद है?

क्या आपने हाल की प्रहरीदुर्ग पत्रिकाएँ ध्यान से पढ़ी हैं? देखिए कि क्या आप नीचे दिए सवालों के जवाब दे पाते हैं या नहीं:

जब सर्किट निगरानों और मंडली के प्राचीनों को परमेश्वर के संगठन से निर्देश मिलते हैं तो उनका क्या रवैया होना चाहिए?

उन्हें तुरंत उन निर्देशों को मानना चाहिए। वे खुद से पूछ सकते हैं, ‘क्या मेरी बातों से भाई-बहनों का विश्वास मज़बूत होता है? जो निर्देश मिलते हैं क्या मैं उन्हें तुरंत कबूल करता हूँ और उनके मुताबिक काम करता हूँ?’—प्र16.11, पेज 11.

सच्चे मसीही कब बैबिलोन की बँधुआई में गए?

प्रेषितों की मौत के कुछ समय बाद वे बँधुआई में गए। उस समय एक पादरी वर्ग की शुरूआत हुई। चर्च और सरकार ने मिलकर झूठे मसीही धर्म को बढ़ावा दिया और पूरी कोशिश की कि सच्चे मसीहियों की कोई न सुने। लेकिन अभिषिक्‍त मसीही 1914 से बहुत पहले महानगरी बैबिलोन की बँधुआई से आज़ाद होने लगे थे।—प्र16.11, पेज 23-25.

“शरीर की बातों पर ध्यान लगाने” और “पवित्र शक्‍ति की बातों पर ध्यान लगाने” में क्या फर्क है? (रोमि. 8:6)

शरीर की बातों पर मन लगानेवाला इंसान शरीर की बातों में गहरी दिलचस्पी लेता है, उन्हीं के बारे में बात करता रहता है और उनका गुलाम बन जाता है। वहीं दूसरी तरफ, पवित्र शक्‍ति की बातों पर मन लगानेवाला इंसान यहोवा की सोच अपनाता है और उसकी पवित्र शक्‍ति के मुताबिक अपनी सोच ढालता है। शरीर पर मन लगाने का अंजाम मौत है जबकि पवित्र शक्‍ति पर मन लगाने से जीवन और शांति मिलती है।—प्र16.12, पेज 15-17.

चिंता कम करने के कुछ तरीके क्या हैं?

अहमियत रखनेवाली बातों को पहली जगह दीजिए; खुद से बहुत ज़्यादा की उम्मीद मत कीजिए; हर दिन अपने लिए थोड़ा वक्‍त निकालिए; यहोवा की सृष्टि को निहारिए; हँसिए-मुस्कुराइए; हर दिन कसरत कीजिए और भरपूर नींद लीजिए।—प्र16.12, पेज 22-23.

किस मायने में “हनोक दूसरी जगह पहुँचा दिया गया ताकि वह मौत का मुँह न देखे”? (इब्रा. 11:5)

परमेश्वर ने हनोक को शायद इस तरह मौत की नींद सुला दिया कि उसे दर्द का कोई एहसास नहीं हुआ न ही उसे पता चला कि वह मर रहा है।—प्र17.अंक 1, पेज 12-13.

मर्यादा में रहना क्यों ज़रूरी है?

मर्यादा में रहनेवाला इंसान अपने आपको अच्छी तरह जानता है और उसे एहसास रहता है कि कुछ चीज़ें हैं जिन्हें वह खुद नहीं कर सकता या जिन्हें करने की उसे इजाज़त नहीं। यह एहसास उसे दूसरों का आदर करने और उनके साथ प्यार से पेश आने के लिए उभारेगा। वह खुद को दूसरों से बेहतर नहीं समझेगा।—प्र17.01, पेज 18.

क्या सबूत दिखाते हैं कि परमेश्वर ने पहली सदी में शासी निकाय की अगुवाई की और आज भी कर रहा है?

पहली सदी में पवित्र शक्‍ति ने शासी निकाय के भाइयों को बाइबल की सच्चाइयाँ समझने में मदद दी। स्वर्गदूतों की मदद से वे प्रचार काम की देखरेख कर पाए और परमेश्वर के वचन से उन्हें मार्गदर्शन मिला। आज भी यहोवा इन तरीकों से शासी निकाय की अगुवाई कर रहा है।—प्र17.02, पेज 26-28.

किन बातों की वजह से फिरौती के लिए हमारी कदर बढ़ जाती है?

इन चार बातों की वजह से: तोहफा किसने दिया, क्यों दिया, इसके लिए क्या त्याग करना पड़ा और इस तोहफे से कौन-सी ज़रूरत पूरी हुई। फिरौती के मामले में ये चार बातें कैसे पूरी हुईं, इस पर मनन करने से फिरौती के लिए हमारी कदर बढ़ जाएगी।—प्र17.अंक 2, पेज 4-6.

क्या एक मसीही के लिए अपना फैसला बदलना सही होगा?

बेशक हमें अपनी बात से मुकरना नहीं चाहिए। लेकिन कभी-कभी हमें अपने फैसले पर दोबारा गौर करना पड़ सकता है। जब नीनवे के लोगों ने पश्‍चाताप किया तो परमेश्वर ने अपना फैसला बदल दिया और नीनवे का नाश नहीं किया। कभी-कभी हमें भी अपना फैसला बदलना पड़ सकता है जैसे, जब हालात बदल जाते हैं या हमें कोई नयी जानकारी मिलती है।—प्र17.03, पेज 16-17.

दूसरों के बारे में बुरी बातें फैलाने में क्या खतरा है?

इससे मामला और बिगड़ सकता है। चाहे हमारे साथ सचमुच में अन्याय हुआ हो या न हुआ हो, ठेस पहुँचानेवाली बातें बोलने से मामला कभी नहीं सुधरता।—प्र17.04, पेज 21.