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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग  |  अंक 6 2017

 आपके सवाल

क्या मसीहियों को क्रिसमस मनाना चाहिए?

क्या मसीहियों को क्रिसमस मनाना चाहिए?

पूरी दुनिया में लाखों लोग मानते हैं कि क्रिसमस का त्योहार यीशु के जन्मदिन की खुशी में मनाया जाता है। लेकिन ज़रा सोचिए, क्या यीशु के ज़माने में उसके शिष्यों ने कभी क्रिसमस मनाया था? बाइबल में जन्मदिन के बारे में क्या बताया गया है? इन सवालों के जवाब जानने से आप यह भी जान पाएँगे कि क्या मसीहियों को क्रिसमस मनाना चाहिए।

पहली बात, बाइबल में कहीं भी नहीं बताया गया कि यीशु या परमेश्वर के किसी और सेवक का जन्मदिन मनाया गया था। बाइबल में सिर्फ दो आदमियों का ज़िक्र है, जिन्होंने अपना जन्मदिन मनाया। वे दोनों ही यहोवा परमेश्वर (बाइबल के मुताबिक परमेश्वर का नाम) की उपासना नहीं करते थे और दोनों के जन्मदिन पर कुछ बुरा हुआ। (उत्पत्ति 40:20; मरकुस 6:21) इनसाइक्लोपीडिया ब्रिटैनिका बताती है कि पहली और दूसरी सदी में रहनेवाले मसीह के शिष्य जन्मदिन मनाना गलत मानते थे, जो “दूसरे धर्मों का रिवाज़ था।”

यीशु किस तारीख को पैदा हुआ था?

बाइबल में साफ-साफ नहीं बताया गया है कि यीशु का जन्म किस दिन हुआ था। मैक्लिंटॉक और स्ट्राँग विश्वकोश में लिखा है, “मसीह किस दिन पैदा हुआ था, यह न तो ‘नए नियम’ से और न ही किसी और तरीके से पता लगाया जा सकता है।” ज़ाहिर है कि अगर यीशु चाहता कि उसके शिष्य उसका जन्मदिन मनाएँ, तो वह इस बात का ज़रूर ध्यान रखता कि उन्हें उसके जन्म की तारीख पता हो।

एक और बात पर ध्यान दीजिए। बाइबल में यह कहीं नहीं लिखा कि यीशु या उसके किसी शिष्य ने कभी क्रिसमस मनाया हो। न्यू कैथोलिक इनसाइक्लोपीडिया बताती है कि क्रिसमस मनाने का ज़िक्र पहली बार फिलोकालूस के कैलेंडर में किया गया था। यह कैलेंडर रोमी लोगों का एक पंचांग था, जिसकी जानकारी ईसवी सन्‌ 336 की मानी जाती है। इससे पता चलता है कि पहली बार क्रिसमस का ज़िक्र पूरी बाइबल के लिखे जाने और यीशु की मौत के सदियों बाद आता है। यही वजह है कि मैक्लिंटॉक और स्ट्राँग विश्वकोश में बताया गया है, “क्रिसमस की शुरूआत परमेश्वर ने नहीं की और न ही नए नियम में इसका कोई ज़िक्र किया गया है।” *

यीशु ने अपने शिष्यों को कौन-सा दिन मनाने की आज्ञा दी?

हमारे महान शिक्षक यीशु ने अपने शिष्यों को साफ-साफ बताया कि उन्हें कौन-सी बातें माननी हैं। यह बातें बाइबल में दर्ज़ हैं। लेकिन उसने क्रिसमस का कोई ज़िक्र नहीं किया। जैसे एक टीचर चाहता है कि उसने बच्चों को जो हिदायतें दी हैं, उससे हटकर वे कुछ न करें, वैसे ही यीशु चाहता है कि उसके शिष्य बाइबल में “जो लिखा है उससे आगे न” जाएँ।​—1 कुरिंथियों 4:6.

लेकिन एक अहम दिन है, जिसे यीशु के शिष्यों को मनाना था और वे उस बारे में अच्छी तरह जानते थे। वह है, यीशु की मौत का यादगार समारोह। यीशु ने खुद उन्हें आज्ञा दी थी कि उन्हें यह समारोह कब और कैसे मनाना चाहिए। बाइबल में इस बारे में साफ-साफ निर्देश दिए गए हैं और उसकी मौत की तारीख भी बतायी गयी है।​—लूका 22:7, 19; 1 कुरिंथियों 11:25.

जैसे हमने देखा, क्रिसमस जन्मदिन के नाम पर मनाया जानेवाला त्योहार है और यीशु के शुरूआती शिष्य इसे नहीं मनाते थे। बाइबल में भी कहीं नहीं बताया गया कि यीशु या किसी और ने क्रिसमस मनाया था। इन सारी बातों को ध्यान में रखते हुए पूरी दुनिया में लाखों मसीही मानते हैं कि उन्हें क्रिसमस नहीं मनाना चाहिए।

^ पैरा. 6 क्रिसमस से जुड़े रीति-रिवाज़ों की शुरूआत के बारे में और जानने के लिए 2016 की प्रहरीदुर्ग के अंक 1 में दिया लेख, “आपके सवाल . . . क्या क्रिसमस मनाना सही है?” पढ़ें, जो www.jw.org पर उपलब्ध है।