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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग  |  अंक 4 2016

एला की घाटी

क्या दाविद और गोलियत की लड़ाई का किस्सा सच है?

क्या दाविद और गोलियत की लड़ाई का किस्सा सच है?

कुछ लोग कहते हैं कि दाविद और गोलियत की घटना एक मनगढ़ंत कहानी है। जब आप पिछला लेख पढ़ रहे थे, तो क्या आपको भी ऐसा ही लगा था? अगर हाँ, तो इन तीन सवालों पर गौर कीजिए।

1 | क्या कोई आदमी 9.5 फुट लंबा हो सकता है?

शास्त्र में लिखा है कि गोलियत की लंबाई “छः हाथ एक बित्ता थी।” (1 शमूएल 17:4) एक हाथ 17.5 इंच लंबा होता है और एक बित्ता 8.75 इंच लंबा होता है। इस हिसाब से गोलियत की लंबाई 9 फिट 6 इंच थी। कुछ कहते हैं कि गोलियत इतना लंबा नहीं हो सकता। लेकिन ज़रा सोचिए, जब आज दुनिया के सबसे लंबे व्यक्‍ति की लंबाई 8 फुट 11 इंच हो सकती है, तो क्या यह मुमकिन नहीं कि एक इंसान की लंबाई उससे सिर्फ 6 इंच लंबी हो? गोलियत रपाईम जाति का था। इस जाति के लोग बहुत लंबे-चौड़े हुआ करते थे। मिस्र में ईसा पूर्व 13वीं शताब्दी के मिले कुछ दस्तावेज़ों से पता चलता है कि कनान देश में बड़े-बड़े योद्धा हुआ करते थे, जिनकी लंबाई 8 फुट से भी ज़्यादा हुआ करती थी। इससे हम समझ सकते हैं कि गोलियत की लंबाई ज़्यादा होने के बावजूद नामुमकिन नहीं है।

2 | क्या दाविद नाम का व्यक्‍ति सच में था?

एक वक्‍त था जब जानकार यह मानते थे कि राजा दाविद नाम का कोई आदमी नहीं था, लेकिन आज कोई ऐसा नहीं कह सकता। खोज करनेवालों को पुराने ज़माने का एक पत्थर मिला जिस पर “दाविद का घराना” ये शब्द खुदे हुए हैं। यीशु मसीह ने भी दाविद का ज़िक्र किया था, जिससे पता चलता है कि दाविद सचमुच का व्यक्‍ति था। (मत्ती 12:3; 22:43-45) और खुद यीशु की पहचान कि वह मसीहा है, यह दो वंशावली से पता चलता है जिनमें बताया गया है कि वह राजा दाविद के घराने में पैदा हुआ था। (मत्ती 1:6-16; लूका 3:23-31) इससे पता चलता है कि दाविद नाम का व्यक्‍ति सच में था।

3 | इस घटना में जिस जगह का ज़िक्र किया गया है, क्या सच में ऐसी कोई जगह है?

शास्त्र में लिखा है कि यह युद्ध एला नाम की घाटी में हुआ था। लेकिन इसमें यह भी लिखा है कि पलिश्ती सोको और अजेका नाम के दो नगरों के बीच एक पहाड़ी की ढलान पर डेरा डाले हुए थे। उस पहाड़ी के सामने घाटी पार कर दूसरी पहाड़ी के ढलान पर इसराएलियों का डेरा था। लेकिन क्या सच में ऐसी कोई जगह थी?

ध्यान दीजिए कि हाल ही में उस इलाके में घूमने के लिए आए एक व्यक्‍ति ने क्या कहा। वह कहता है, “हमारा गाइड परमेश्वर पर आस्था नहीं रखता था। वह हमें एला घाटी ले गया। वहाँ से हम पहाड़ की चोटी पर गए। चोटी से हमें नीचे का नज़ारा साफ दिखायी दे रहा था। तब उसने हमसे 1 शमूएल 17:1-3 पढ़ने के लिए कहा। फिर उसने घाटी की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘आपकी बायीं तरफ सोको का खंडहर है।’ फिर घूमकर कहा, ‘और दायीं तरफ अजेका का खंडहर है। इन दो नगरों के बीच यहाँ हमारे सामने किसी एक पहाड़ी की ढलान पर पलिश्तियों ने डेरा डाला होगा। और जहाँ इसराएलियों ने डेरा डाला था, हम शायद वहाँ खड़े हैं।’ मैं सोचने लगा कि शायद मैं वहीं खड़ा हूँ, जहाँ एक वक्‍त पर शाऊल और दाविद खड़े थे। फिर हम नीचे उतरे और उस घाटी के मैदान की तरफ गए। हमने एक सूखी नदी पार की, जिसमें सिर्फ पत्थर ही पत्थर थे। मैंने सोचा कि दाविद ने यहीं से पाँच चिकने पत्थर उठाए होंगे, जिनमें से एक से उसने गोलियत को मारा था।” घूमने के लिए आए इस व्यक्‍ति ने और उसकी तरह दूसरे कई लोगों ने देखा कि शास्त्र में दी यह घटना कितनी बारीकी से बतायी गयी है और वह सारी जानकारी वाकई सच्ची है। यह बात उनके दिल को छू गयी।

यह ऐतिहासिक घटना सच है या नहीं, इस बारे में शक का कोई आधार नहीं है। यह घटना सचमुच की जगह पर हुई थी और इसमें बताए गए लोग वाकई जीए थे। लेकिन उससे भी बड़ी बात यह है कि इस घटना का ब्यौरा खुद परमेश्वर ने शास्त्र में लिखवाया है और वह “झूठ नहीं बोल सकता।”—तीतुस 1:2; 2 तीमुथियुस 3:16. ▪ (wp16-E No. 5)