हमने पहले गीता नाम की स्त्री का ज़िक्र किया था, जिसके पति रंजन की मौत हो गयी थी। उसे लगता है कि वह कभी इस दुख से उबर नहीं पाएगी। लेकिन उसे यह उम्मीद ज़रूर है कि एक दिन वह अपने पति से दोबारा मिलेगी। परमेश्वर ने वादा किया है कि बहुत जल्द एक ऐसा वक्‍त आएगा, जब वह इस धरती को एक खूबसूरत बगीचे जैसा बना देगा। उस समय के बारे में पवित्र शास्त्र में बताया गया है, ‘परमेश्वर इंसानों की आँखों से हर आँसू पोंछ देगा, और न मौत रहेगी, न मातम, न रोना-बिलखना, न ही दर्द रहेगा। पिछली बातें खत्म हो चुकी हैं।’ (प्रकाशितवाक्य 21:3, 4) गीता को यह बात बहुत अच्छी लगती है।

वह कहती है, “इस वादे से एक इंसान को दिलासा मिलता है और आस होती है। जब मैं ऐसे लोगों के बारे में सोचती हूँ, जिन्हें ये मालूम ही नहीं कि उनके अपने जो अब नहीं रहे, ज़िंदा किए जाएँगे और वे उनसे दोबारा मिल सकेंगे, तो मेरा मन करता है कि मैं उन्हें इस बारे में बताऊँ।” गीता जैसे सोचती है, वैसे करती भी है। वह हर महीने लोगों को परमेश्वर के वादों के बारे में बताने में करीब 70 घंटे बिताती है।

अय्यूब को पूरा यकीन था कि उसे ज़िंदा किया जाएगा

आप शायद कहें कि जो नहीं रहे, वे ज़िंदा हो ही नहीं सकते! लेकिन ध्यान दीजिए कि यह वादा खुद परमेश्वर ने किया है। ज़रा अय्यूब नाम के एक व्यक्ति की मिसाल लीजिए। उसे परमेश्वर पर बहुत विश्वास था। उसने कहा कि परमेश्वर अपने सेवकों को दोबारा ज़िंदा करने के लिए तरस रहा है। (अय्यूब 14:13, 15) उसके जीवन में एक वक्‍त ऐसा आया था, जब उसने अपने लिए दुआ माँगी कि वह मर जाए, क्योंकि वह बहुत बीमार था। (अय्यूब 2:7) लेकिन उसे पूरा यकीन था कि उसके न रहने पर परमेश्वर उसे हर पल याद करेगा। उसे भरोसा था कि परमेश्वर उसे फिर से जी उठाएगा। इसलिए उसने कहा कि जब परमेश्वर उसे पुकारेगा, तो वह जवाब देगा।

बहुत जल्द परमेश्वर इस धरती को एक खूबसूरत बगीचा बनाएगा, तब वह न सिर्फ अपने भक्‍त अय्यूब को, बल्कि अनगिनत लोगों को दोबारा ज़िंदा करेगा। (लूका 23:42, 43) पवित्र शास्त्र में लिखा है, “लोग मरे हुओं में से जी उठेंगे।” (प्रेषितों 24:15) परमेश्वर के बेटे यीशु ने भी कहा था, “इस बात पर ताज्जुब मत करो, क्योंकि वह वक्‍त आ रहा है जब वे सभी जो स्मारक कब्रों में हैं उसकी आवाज़ सुनेंगे और बाहर निकल आएँगे।” (यूहन्ना 5:28, 29) अय्यूब इस वादे को पूरा होते हुए देखेगा। जब उसे ज़िंदा किया जाएगा, तो ‘उसकी जवानी के दिन फिर लौट आएँगे’ और उसकी त्वचा बच्चे की त्वचा जैसी कोमल हो जाएगी। (अय्यूब 33:24, 25) जो परमेश्वर के इस वादे पर विश्वास करते हैं, वे भी अय्यूब की तरह इसे पूरा होते हुए देखेंगे।

अगर आपने भी किसी अपने को खोया है, तो अब तक आपने जो भी पढ़ा है, उससे आपका दुख मिट तो नहीं हो जाएगा, लेकिन जब आप पवित्र शास्त्र में दिए परमेश्वर के वादों के बारे में सोचेंगे, तो आपको अपने अज़ीज़ से दोबारा मिलने की उम्मीद होगी और ज़िंदगी की राह में चलने के लिए हिम्मत मिलेगी।—1 थिस्सलुनीकियों 4:13.

क्या आप इस बारे में और जानना चाहेंगे? या फिर अगर आपके मन में कुछ और सवाल हैं, जैसे “परमेश्वर ने बुराई और दुख-तकलीफें क्यों रहने दीं?”, तो हमारी वेबसाइट jw.org पर जाइए और इस तरह के सवालों के पवित्र शास्त्र से जवाब जानिए। ▪ (w16-E No. 3)