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यहोवा के साक्षी

हिंदी

प्रहरीदुर्ग  |  अंक 1 2016

 पहले पेज का विषय | क्या प्रार्थना करने का कोई फायदा है?

क्या कोई हमारी प्रार्थनाएँ सुनता है?

क्या कोई हमारी प्रार्थनाएँ सुनता है?

कुछ लोगों का कहना है कि हमारी प्रार्थनाएँ कोई नहीं सुनता और प्रार्थना करके हम सिर्फ अपना समय बरबाद करते हैं। दूसरे ऐसे हैं, जिन्होंने प्रार्थना तो की, लेकिन उन्हें अपनी प्रार्थना का कोई जवाब नहीं मिला। एक नास्तिक ने अपने मन में भगवान की एक तसवीर बनायी और फिर कहा कि अगर तू है, तो इस बात का कोई छोटा-सा सबूत तो दे! लेकिन फिर उसने कहा कि उसे कोई जवाब नहीं मिला।

लेकिन पवित्र शास्त्र हमें यकीन दिलाता है कि एक परमेश्वर है, जो हमारी प्रार्थनाओं को सुनता है। इसमें लिखी एक बात पर ध्यान दीजिए, जो सदियों पहले कुछ लोगों से कही गयी थी, “वह [परमेश्वर] तुम्हारी दोहाई सुनते ही तुम पर निश्चय अनुग्रह करेगा: वह सुनते ही तुम्हारी मानेगा।” (यशायाह 30:19) इसमें यह भी लिखा है, “वह सीधे लोगों की प्रार्थना से प्रसन्न होता है।”—नीतिवचन 15:8.

यीशु ने अपने पिता से प्रार्थना की “और उसकी सुनी गयी।”—इब्रानियों 5:7

पवित्र शास्त्र में कुछ ऐसे लोगों के बारे में भी बताया गया है, जिनकी प्रार्थनाएँ सुनी गयी थीं। उदाहरण के लिए, इसमें बताया है कि परमेश्वर के बेटे, यीशु ने ‘उससे बिनतियाँ कीं जो उसे बचा सकता था और उसकी सुनी गयी।’ (इब्रानियों 5:7) पवित्र शास्त्र में और भी कई लोगों का ज़िक्र किया गया है, जिन्हें उनकी प्रार्थनाओं का जवाब मिला।—दानिय्येल 9:21; 2 इतिहास 7:1.

तो फिर कुछ लोगों को ऐसा क्यों लगता है कि उनकी प्रार्थनाएँ सुनी नहीं जातीं? अगर हम चाहते हैं कि हमारी प्रार्थनाएँ सुनी जाएँ, तो हमें सिर्फ यहोवा परमेश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए, किसी और से नहीं। (पवित्र शास्त्र के मुताबिक परमेश्वर का नाम यहोवा है।) परमेश्वर यह भी चाहता है कि हम “उसकी मरज़ी के मुताबिक” प्रार्थना करें, यानी उन बातों के लिए प्रार्थना करें, जो उसकी नज़र में सही हैं। और वह हमें यकीन दिलाता है कि अगर हम ऐसा करें, तो ‘वह हमारी सुनेगा।’ (1 यूहन्ना 5:14) इसका मतलब है कि अगर हम चाहते हैं कि हमारी प्रार्थनाएँ सुनी जाएँ, तो हमें यहोवा परमेश्वर और उसकी मरज़ी के बारे में जानना होगा।

बहुत-से लोगों को लगता है कि प्रार्थना करना सिर्फ एक धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि भगवान वाकई हमारी प्रार्थनाओं को सुनता है और उनका जवाब देता है। केन्या के रहनेवाले आएसैक का भी यही मानना है। वह कहता है, “मैंने भगवान से प्रार्थना की कि वह बाइबल में लिखी बातों को समझने में मेरी मदद करे। प्रार्थना करने के कुछ ही समय बाद एक व्यक्‍ति मुझसे मिला और उसने मुझसे कहा कि वह शास्त्र को समझने में मेरी मदद कर सकता है।” ज़रा फिलिपाईन्स की रहनेवाली हिल्डा की मिसाल पर ध्यान दीजिए। हिल्डा को सिगरेट पीने की लत लग गयी थी, लेकिन वह इसे छोड़ना चाहती थी। लाख कोशिश करने के बाद भी वह कामयाब नहीं हुई। फिर उसके पति ने उससे कहा, “क्यों न तुम भगवान से प्रार्थना करके देखो? शायद वह तुम्हारी मदद करे।” उसने ऐसा ही किया। वह कहती है, “जिस तरह भगवान ने मेरी मदद की, उसे देखकर मैं हैरान रह गयी। सिगरेट पीने की मेरी इच्छा ही खत्म हो गयी और मुझे इस लत से छुटकारा मिल गया।”

अगर आपकी प्रार्थनाएँ परमेश्वर की मरज़ी के मुताबिक होंगी, तो क्या वह उनका जवाब देगा? अगला लेख इस सवाल का जवाब देता है। (w15-E 10/01)