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यहोवा के साक्षी

हिंदी

2017 यहोवा के साक्षियों की सालाना किताब

खुलो के केबल-कार स्टेशन में भाई-बहन प्रचार कर रहे हैं

 जॉर्जिया

“यही यहोवा के सेवकों की विरासत है।”—यशा. 54:17

“यही यहोवा के सेवकों की विरासत है।”—यशा. 54:17

जॉर्जिया में यहोवा के सेवकों ने खुशखबरी सुनाने में कड़ी मेहनत की है और यहोवा ने उनकी मेहनत पर आशीष दी है। इसलिए देश के तकरीबन हर कोने तक खुशखबरी पहुँच गयी है।

प्रचारक उशगुली में प्रचार करने की तैयारी कर रहे हैं, जो समुद्र-तल से करीब 7,200 फुट ऊँचाई पर है

अब बीते कुछ सालों से जोशीले प्रचारक और पायनियर उन इलाकों पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं जहाँ बहुत कम प्रचार हुआ है। पहाड़ी इलाकों में कुछ  ऐसे गाँव और छोटी-छोटी बस्तियाँ हैं जहाँ तक सिर्फ गाड़ियों और केबल-कार से पहुँचा जा सकता है।

स्वानेती प्रांत में प्रचारक

सन्‌ 2009 से हर साल जॉर्जिया का शाखा दफ्तर सभी मंडलियों को उन इलाकों की सूची दे रहा है जो किसी भी मंडली के प्रचार इलाके में नहीं आते। इस तरह शाखा दफ्तर प्रचारकों को बढ़ावा दे रहा है कि वे उन इलाकों में जाकर प्रचार करें। ऐसा करने के लिए बहुत-से प्रचारकों को बड़े-बड़े त्याग करने पड़े हैं।

आना और तेमुरी ब्लीयाद्‌ज़े

तेमुरी और आना ब्लीयाद्‌ज़े की नयी-नयी शादी हुई थी और उन्होंने एक नया घर बनाने के लिए ज़मीन खरीदी थी। फिर उन्हें पता चला कि एज़रीया नाम के पहाड़ी इलाके में प्रचारकों की ज़्यादा ज़रूरत है। अब उनके सामने ज़्यादा सेवा करने का बढ़िया मौका था।

वे पहले एक हफ्ते के लिए एज़रीया गए। तेमुरी बताता है कि वहाँ जाने पर उसने क्या देखा: “वहाँ के प्रचारकों को दूर-दूर के छोटे गाँवों तक जाने के लिए काफी पैदल चलना पड़ता था। हमारे पास एक वैन थी, इसलिए मैंने फौरन सोचा कि हमारी गाड़ी यहाँ बहुत काम आएगी।”

आना कहती है, “वहाँ जाकर बसना इतना आसान नहीं था क्योंकि हमें अपनी मंडली और परिवार से बहुत लगाव था। मगर हमें एहसास हुआ कि यहोवा हमें वहाँ जाने का निर्देश दे रहा है।” तेमुरी और आना तीन साल से ज़्यादा समय से एज़रीया के कसबे केदा में एक छोटे-से समूह की मदद कर रहे हैं।

नयी-नयी तरकीबें सोचनेवाले पायनियर

अस्थायी खास पायनियरों ने दूर-दराज़ के इलाकों में प्रचार करने में बहुत मदद दी है। उन्हें जितने समय के लिए वहाँ भेजा जाता था उतना समय पूरा होने के बाद ज़्यादातर पायनियर वहीं रहने का फैसला करते थे ताकि जिन लोगों के साथ उन्होंने बाइबल अध्ययन शुरू किया था उनकी मदद कर सकें।

 दो पायनियर बहनों को मानग्लीसी नाम के एक सुंदर कसबे में भेजा गया था। दोनों बहनों का नाम खातुना है। मानग्लीसी में एक भी साक्षी नहीं था। दोनों बहनों को प्रचार में बहुत बढ़िया नतीजे मिले। पहले महीने में उन्होंने 9 बाइबल अध्ययन चलाए, अगले महीने 12, फिर 15 और फिर 18! वे आगे भी अपने बाइबल विद्यार्थियों की मदद करना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने मानग्लीसी में ही रह जाने का फैसला किया।

हमारी बहनों को अपने गुज़ारे के लिए नयी-नयी तरकीबें सोचनी पड़ती थीं। मानग्लीसी, चीड़ शंकु के मुरब्बे के लिए बहुत मशहूर है और यह मुरब्बा सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। इसलिए जो लोग वहाँ घूमने जाते हैं वे उसे बहुत पसंद करते हैं। शुरू में हमारी बहनें चीड़ के हरे-हरे शंकु इकट्ठा करतीं और मुरब्बा बनाकर बाज़ार में बेचती थीं। मगर फिर उन्हें गुज़ारा करने का एक नया तरीका मिला जो उन्होंने सोचा भी नहीं था।

एक दिन उनकी एक बाइबल विद्यार्थी उनके पास कई चूज़े ले आयी। उसने  बताया कि उसकी मुर्गी ने किसी कोने में अंडे दिए थे और उनसे ये चूज़े निकले थे। वह औरत अपने बाइबल शिक्षकों को ये चूज़े देना चाहती थी। उन दो बहनों में से एक मुर्गी पालना जानती थी, इसलिए उन्होंने सोचा कि वे एक छोटा-सा मुर्गी फार्म खोलकर उससे गुज़ारा करेंगी।

एक बहन कहती है, “यहोवा और भाई-बहनों और बाइबल विद्यार्थियों की मदद से हम पाँच साल तक मानग्लीसी में रह पाए।” आज वहाँ जोशीले भाई-बहनों से बना एक समूह है।

मानग्लीसी में खातुना खारेबाश्वीली और खातुना तसुलाइया

विदेशी भाषा बोलनेवाले इलाकों में पायनियर सेवा

हाल के कुछ सालों से जॉर्जिया में बड़ी तादाद में विदेशी लोग आने लगे हैं। बहुत-से पायनियरों ने देखा है कि वे इन लोगों को भी प्रचार कर सकते हैं। इसलिए वे दूसरी भाषाएँ सीखने लगे, जैसे अँग्रेज़ी, अज़रबाइजानी, अरबी, चीनी, तुर्की और फारसी।

कई पायनियर विदेशी भाषा बोलनेवाले समूहों और मंडलियों में सेवा करने लगे हैं, जबकि दूसरे पायनियर उन देशों में जाकर बस गए हैं जहाँ प्रचारकों की ज़्यादा ज़रूरत है। गीयोरगी और गेला नाम के दो भाई, जिनकी उम्र 20 से ज़्यादा थी, एक पड़ोसी देश में जाकर बस गए। गीयोरगी कहता है, “हम यहोवा की सेवा में अपना भरसक करना चाहते थे और इसका सबसे बढ़िया तरीका था दूसरे देश में जाकर प्रचार करना।”

गेला उस वक्‍त को याद करते हुए कहता है, “ऐसे इलाके में एक प्राचीन के नाते सेवा करके मैंने बहुत कुछ सीखा। इस बात से मुझे बड़ी खुशी मिलती है कि मेरे जैसा आम इंसान भी यहोवा की ‘छोटी भेड़ों’ की देखभाल करने के लिए उसके काम आ सकता है।”—यूह. 21:17.

गीयोरगी कहता है, “हमारे सामने कई मुश्किलें आयीं, मगर हमने अपना ध्यान सेवा पर लगाया और अपने देश लौटने के बारे में कभी नहीं सोचा। हमें यकीन था कि हम वही कर रहे हैं जो हमें करना चाहिए।”

 एक और भाई ने कुछ साल के लिए तुर्की में सेवा की थी। उसका नाम भी गेला है। वह कहता है, “शुरू में वहाँ की भाषा सीखने के लिए मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा, इसलिए अपनी खुशी बरकरार रखना मुश्किल लगा। मगर एक बार जब मैंने भाई-बहनों से और प्रचार में लोगों से बात करना सीख लिया तो मेरी खुशी बढ़ती गयी।”

नीनो नाम की एक बहन तुर्की के शहर इस्तानबुल में 10 से भी ज़्यादा साल से पायनियर सेवा कर रही है। वह कहती है, “मैं जिस दिन यहाँ आयी थी, उसी दिन से महसूस करने लगी कि यहोवा मेरी मदद कर रहा है। विदेश में पायनियर सेवा करने से लगभग हर दिन हमें ऐसे अनोखे अनुभव होते हैं जो हम सालाना किताब में पढ़ते हैं।”