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यहोवा के साक्षी

हिंदी

2017 यहोवा के साक्षियों की सालाना किताब

ज़ुगदीदी के पास पायनियर स्कूल

 जॉर्जिया | 1998-2006

‘अच्छे और बुरे समय’ में आशीषें।—2 तीमु. 4:2

‘अच्छे और बुरे समय’ में आशीषें।—2 तीमु. 4:2

 सन्‌ 1995 के बाद के सालों से जॉर्जिया में प्रचारकों और दिलचस्पी रखनेवालों की गिनती तेज़ी से बढ़ने लगी। सन्‌ 1998 में मसीह की मौत के स्मारक में करीब 32,409 लोग हाज़िर हुए।

बहुत-से प्रचारक, यहाँ तक कि प्राचीन भी सच्चाई में नए थे और उन्हें ज़्यादा तजुरबा नहीं था। उनमें से ज़्यादातर को प्रचार काम और दूसरी ज़िम्मेदारियाँ निभाने के लिए प्रशिक्षण की ज़रूरत थी। उन्हें यह प्रशिक्षण कैसे दिया जाता?

यहोवा के संगठन ने मदद दी

मार्च 1998 में जर्मनी से आरनो और ज़ॉन्या टुंग्ले को जॉर्जिया भेजा गया। उन दोनों ने जर्मनी में रखे गए संक्षिप्त गिलियड स्कूल से शिक्षा पायी थी। उसी साल शासी निकाय ने जॉर्जिया में देश-समिति दफ्तर खोलने की मंज़ूरी दे दी, जिसकी निगरानी रूस का शाखा दफ्तर करता।

जल्द ही एक देश-समिति वहाँ के प्रचार काम की निगरानी करने लगी। जब हमारे काम को कानूनी तौर पर रजिस्टर किया गया तो बाइबल के प्रकाशन उस समय के जर्मनी शाखा दफ्तर से मँगाए जाने लगे। कानूनी मान्यता पाने की वजह से अब राज-घर और शाखा दफ्तर बनाने के लिए ज़मीन खरीदना भी मुमकिन हो गया।

प्रशिक्षण का समय

जब जॉर्जिया पर सोवियत संघ का राज था तब कई साल तक हमारे काम पर रोक थी। इसलिए बहुत-से प्रचारक खुलकर घर-घर प्रचार नहीं कर पा रहे थे। आरनो टुंग्ले बताता है, “ज़्यादातर प्रचारक सड़क गवाही का काम तो बहुत करते थे, मगर उनमें से कइयों को न तो घर-घर जाकर प्रचार  करने की और न ही दिलचस्पी रखनेवालों से दोबारा मिलने की आदत थी।”

आरनो और ज़ॉन्या टुंग्ले

दावीत देवीद्‌ज़े, जिसने मई 1999 से देश-समिति दफ्तर में सेवा करनी शुरू की थी, बताता है: “परमेश्वर की सेवा में बहुत काम थे, बेथेल में भी और बाहर भी। हमने इन कामों के बारे में पढ़ा था, मगर इन्हें कैसे करना है इस बारे में हम कुछ भी नहीं जानते थे। इसलिए हमने उन तजुरबेकार भाइयों को काम करते देखकर सीखा जिन्हें शासी निकाय ने भेजा था।”

जॉर्जिया के भाइयों के लिए ज़बरदस्त प्रशिक्षण का एक दौर शुरू हुआ। इससे न सिर्फ सीखनेवाले भाइयों को बल्कि सिखानेवाले भाइयों को भी फायदा हुआ, जैसा कि दूसरी जगह जाकर सेवा करनेवाले भाई अकसर अनुभव करते हैं।—नीति. 27:17.

जॉर्जिया के साक्षियों के मनभावने गुण

आरनो और ज़ॉन्या के पास कई मीठी यादें हैं। जब वे जॉर्जिया पहुँचे तो अगले कुछ दिनों तक भाई-बहनों ने उनका प्यार से स्वागत किया। उन्होंने उन दोनों को नयी जगह में ढलने में बहुत मदद दी।

 ज़ॉन्या याद करती है कि वहाँ के भाई-बहन कितने दरियादिल हैं। वह बताती है, “एक जोड़ा, जो हमारे घर के पास रहता था, हमारे लिए स्वादिष्ट खाना लाता रहा। एक बहन हमें प्रचार में ले गयी, उसने नयी मंडली से हमारा परिचय कराया और जॉर्जिया की संस्कृति के बारे में बहुत सारी बातें बतायीं। एक और बहन ने सब्र से हमें जॉर्जियाई भाषा सिखायी।”

सन्‌ 1999 में कनाडा से वॉरन और लैज़ली शूफैल्ट को जॉर्जिया भेजा गया। वे कहते हैं, “जॉर्जिया के भाई-बहनों का प्यार हमारे दिल को छू गया। छोटे-बड़े, सब एक-दूसरे से खुलकर प्यार करते थे। वे हमारे लिए अच्छी मिसाल थे।”

देश-समिति दफ्तर में जॉर्जिया के भाई-बहन, तजुरबेकार मिशनरियों के साथ सेवा करते थे

दूसरे देशों से जॉर्जिया भेजे गए भाई-बहनों ने अपनी मुश्किलों पर ध्यान देने के बजाय वहाँ के लोगों के अच्छे गुणों पर ध्यान दिया। और उन मिशनरियों की नम्रता और प्यार देखकर जॉर्जिया के भाई-बहन भी जल्द ही उनके करीब आ गए।

 परमेश्वर का डर माननेवालों ने सच्चाई स्वीकार की

सन्‌ 1991 से 1999 तक बहुत-से नेकदिल लोगों ने सच्चाई स्वीकार की। सन्‌ 1998 में ही 1,724 लोगों ने बपतिस्मा लिया। किस बात ने सच्चाई में इतने सारे लोगों की दिलचस्पी जगायी?

तामाज़ी बीब्लाइया, जो कई साल तक सफरी निगरान था, बताता है: “हमेशा से वहाँ के लोगों में परमेश्वर के लिए प्यार रहा है। इसलिए जब हमने उन्हें बाइबल का संदेश बताया तो उन्होंने फौरन सुना।”

दावीत सामकाराद्‌ज़े, जो राज प्रचारकों के लिए स्कूल में सिखाता है, कहता है: “जब कोई बाइबल का अध्ययन करना शुरू करता है तो अकसर रिश्तेदार और पड़ोसी उसे रोकने की कोशिश करते हैं। मगर कई बार होता यह है कि बाइबल अध्ययन को रोकने की कोशिश करते-करते वे खुद अध्ययन करने लगते हैं!”

जैसे-जैसे राज का संदेश फैलता गया, कई सारे लोगों की ज़िंदगी बदल गयी। अप्रैल 1999 में एक नया शिखर हासिल हुआ। स्मारक में 36,669 लोग हाज़िर हुए।

‘विरोधी बहुत हैं’

प्रेषित पौलुस ने प्राचीन इफिसुस में अपने प्रचार काम के बारे में लिखा, “मेरे लिए मौके का एक दरवाज़ा खोला गया है कि मैं और ज़्यादा सेवा कर सकूँ, मगर विरोधी भी बहुत हैं।” (1 कुरिं. 16:9) सन्‌ 1999 में हुए यादगार स्मारक के कुछ महीनों बाद, जॉर्जिया के साक्षियों ने पौलुस के जैसे हालात का सामना किया।

उस साल अगस्त में तिब्लिसी में ऑर्थोडॉक्स चर्च के उग्रवादी गुट ने साक्षियों के विरोध में एक जुलूस निकाला और सरेआम हमारे प्रकाशन जलाए। उस गुट का नेता एक ऐसा आदमी था जिसे पादरी के पद से हटा दिया गया था। उसका नाम था वासीली मकालावीश्वीली। उस जुलूस  के बाद से साक्षियों पर ज़ुल्मों का ऐसा दौर शुरू हुआ जो चार साल तक चलता रहा।

सन्‌ 1999 से जॉर्जिया में यहोवा के साक्षियों का विरोध किया गया, उनकी किताबें जला दी गयीं और उन पर हमले किए गए

17 अक्टूबर, 1999 को धर्म के कुछ कट्टरपंथियों ने करीब 200 लोगों की एक भीड़ जमा की और तिब्लिसी में ग्लदानी मंडली की सभा रोक दी। उन्होंने लाठियों और लोहे के क्रूस से सभा में हाज़िर लोगों को मारा जिस वजह से कई साक्षियों को अस्पताल में भरती करना पड़ा।

दुख की बात है कि हमला करनेवालों को गिरफ्तार नहीं किया गया और साक्षियों पर हमले होते रहे। कई सरकारी अधिकारियों ने, यहाँ तक कि राष्ट्रपति शेशेवार्दनाद्‌ज़े ने भी उन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। मगर उन्हें रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। पुलिस अधिकारी तो अकसर हमले के काफी समय बाद वारदात की जगह पहुँचते थे।

उसी दौरान जॉर्जिया के संसद के सदस्य, गुराम शाराद्‌ज़े ने साक्षियों को बदनाम करने का ऐसा अभियान शुरू कर दिया जो पहले कभी नहीं हुआ था। उसने साक्षियों पर इलज़ाम लगाया कि वे बहुत खतरनाक हैं। ऐसा लग रहा था कि खुशखबरी सुनाने का “अच्छा समय” अब बीत गया है।

यहोवा के संगठन ने विरोध का सामना करने के लिए कदम उठाया

यहोवा के संगठन ने जॉर्जिया के साक्षियों की मदद करने के लिए फौरन कदम उठाया। वहाँ के भाइयों को हिदायतें दी गयीं कि हमला होने पर उन्हें क्या करना चाहिए। उन्हें यह भी याद दिलाया गया कि सच्चे मसीहियों को क्यों कभी-कभी ज़ुल्म सहना पड़ता है।—2 तीमु. 3:12.

इसके अलावा, यहोवा के संगठन ने अदालत में हमारे भाइयों की वकालत करने के लिए कदम उठाया। एक भाई, जो जॉर्जिया के शाखा दफ्तर के कानून विभाग में सेवा करता था, बताता है: “उन चार सालों के दौरान  वासीली मकालावीश्वीली के गुट ने जो किया था, उसके जवाब में हमने कई संगठनों और सरकारी अधिकारियों के पास 800 से ज़्यादा शिकायतें दर्ज़ कीं। हमने अधिकारियों और मानव अधिकारों के संगठनों से मदद माँगी। यहोवा के साक्षियों के विश्व मुख्यालय ने हम पर होनेवाले हमलों के बारे में जनता को बताने के लिए बड़े पैमाने पर एक अभियान शुरू किया। मगर इन सारी कोशिशों के बावजूद हमले रुके नहीं।” *

^ पैरा. 30 हमारे अधिकारों के लिए हुई कानूनी लड़ाई के बारे में ज़्यादा जानने के लिए 22 जनवरी, 2002 की सजग होइए! (अँग्रेज़ी) के पेज 18-24 देखें।