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यहोवा के साक्षी

हिंदी

संतोष से भरी ज़ंदगी—कैसे हासिल की जा सकती है

 भाग 5

परमेश्‍वर को जानना

परमेश्‍वर को जानना

अगर आपको सलाह की ज़रूरत पड़े, तो क्या आप एक ऐसे इंसान के पास नहीं जाएँगे जिस पर आपको भरोसा हो? अगर सलाह देनेवाला भरोसे के लायक है, तो आप उसकी सलाह खुशी-खुशी मानेंगे, भले ही उससे आपको तुरंत फायदा पहुँचे या ना पहुँचे। अगर आप बाइबल में दी गयी कारगर सलाह से सचमुच फायदा पाना चाहते हैं, तो आपको ज़रूर उसके रचनाकार को जानना होगा। ऐसा करने से आप उसके “मित्र” भी बन सकते हैं!—यशायाह 41:8, NHT.

यशायाह की किताब के इब्रानी पाठ में परमेश्‍वर का नाम

2 अगर आप किसी से दोस्ती करना चाहते हैं तो बेशक सबसे पहले आप उसका नाम जानना चाहेंगे। क्या बाइबल के रचनाकार यानी परमेश्‍वर का कोई नाम है? वह खुद बताता है: “मैं यहोवा हूं, मेरा नाम यही है; अपनी महिमा मैं दूसरे को न दूंगा और जो स्तुति मेरे योग्य है वह खुदी हुई मूरतों को न दूंगा।” (यशायाह 42:8) परमेश्‍वर का नाम “यहोवा” है जिसे इब्रानी भाषा में ऐसे लिखा जाता है יהוה (इसे दायीं से बायीं तरफ पढ़ा जाता है)। यह नाम बाइबल के इब्रानी शास्त्र में करीब 7,000 बार आता है। परमेश्‍वर के नाम का मतलब है, “वह बनने का कारण होता है।” इससे ज़ाहिर होता है कि यहोवा को अपना मकसद पूरा करने के लिए जो भी बनना ज़रूरी पड़े, वह बन जाता है और अपने मकसद को पूरा करने के लिए अपनी सृष्टि को भी जो चाहे बना सकता है। इतना ही नहीं, उसके नाम को इब्रानी व्याकरण में जिस तरह से लिखा जाता है उसका मतलब ऐसी क्रिया है जो अभी भी जारी है। इससे हमें क्या पता चलता है? यही कि यहोवा अपने मकसद को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रहा है। वह एक जीवता परमेश्‍वर है, कोई निराकार शक्‍ति नहीं!

3 यहोवा सिरजनहार बना। (उत्पत्ति 1:1) वह ‘जीवता परमेश्‍वर है जिस ने स्वर्ग और पृथ्वी और समुद्र और जो कुछ उन में है बनाया।’ (प्रेरितों 14:15) यहोवा ने सब चीज़ों की सृष्टि की, सबसे पहले जोड़े, आदम और हव्वा को भी उसी ने बनाया था। इसलिए परमेश्‍वर “जीवन का सोता” है। (भजन 36:9) वह जीवन का पालनहार भी बना। इस तरह ‘उस ने अपने आप को बे-गवाह नहीं छोड़ा; किन्तु वह भलाई करता रहा, और आकाश से वर्षा और फलवन्त ऋतु देकर, तुम्हारे मन को भोजन और आनन्द से भरता रहा।’ (प्रेरितों 14:17) अफ्रीका और एशिया में कई लोग अपने पूर्वजों की इसलिए पूजा करते हैं क्योंकि उन्हीं से उन्हें ज़िंदगी मिली है। तो क्या उन्हें सृष्टिकर्ता और जीवन के पालनहार के  और भी एहसानमंद नहीं होना चाहिए जिसने पहले जोड़े की सृष्टि की और उन्हें संतान पैदा करने की शक्‍ति दी? इस सच्चाई पर मनन करने से शायद आपका मन भी यही कहना चाहे: “हे हमारे प्रभु, और परमेश्‍वर, तू ही महिमा, और आदर, और सामर्थ के योग्य है; क्योंकि तू ही ने सब वस्तुएं सृजीं और वे तेरी ही इच्छा से थीं, और सृजी गईं।”—प्रकाशितवाक्य 4:11.

4 बाइबल के पन्‍नों से आप अपने सिरजनहार यहोवा को जान सकते हैं और सीख सकते हैं कि वह किस तरह का परमेश्‍वर है। बाइबल हमें बताती है कि “परमेश्‍वर प्रेम है।” (1 यूहन्‍ना 4:16; निर्गमन 34:6, 7) जब आप बाइबल की उत्पत्ति से लेकर प्रकाशितवाक्य की किताब पढ़ेंगे तो आपको ऐसी कई घटनाओं का वर्णन मिलेगा जो साबित करती हैं कि यहोवा वाकई में प्रेम करनेवाला परमेश्‍वर है। अपने सिरजनहार को जानने के लिए क्यों न आप हर दिन उसका वचन पढ़ने की आदत डालें? जो लोग बाइबल के बारे में अच्छा ज्ञान रखते हैं, उनकी मदद से बाइबल का ध्यान से अध्ययन कीजिए। (प्रेरितों 8:26-35) ऐसा करने से आप समझ पाएँगे कि वह एक न्यायी परमेश्‍वर है जो हमेशा के लिए दुष्टता को बरदाश्‍त नहीं करता रहेगा। (व्यवस्थाविवरण 32:4) इंसाफ का तकाज़ा पूरा करने के साथ-साथ प्यार दिखाना इंसान के लिए बहुत मुश्‍किल काम है लेकिन यहोवा के पास इतनी बुद्धि है कि वह परिपूर्णता के साथ प्यार और इंसाफ, दोनों का तकाज़ा पूरा कर सकता है। (रोमियों 11:33; 16:27) सर्वशक्‍तिमान परमेश्‍वर होने के नाते, उसके पास अपने उद्देश्‍यों को पूरा करने के लिए जो चाहे वह करने की शक्‍ति है। (उत्पत्ति 17:1) इसलिए आप बाइबल में जो भी बुद्धि-भरी सलाह पाते हैं, उस पर चलने की कोशिश कीजिए। तब आप अपने सिरजनहार की और ज़्यादा कदर करने लगेंगे और आपको यकीन होगा कि उसकी सलाह पर चलने से हमेशा आप ही को फायदा होगा।

क्यों न प्रार्थना के ज़रिए यहोवा के पास जाएँ?

5 लेकिन परमेश्‍वर के करीब आने का एक और तरीका भी है। और वह है प्रार्थना। यहोवा ‘प्रार्थना का सुननेवाला’ है। (भजन 65:2) वह “हमारी बिनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता है।” (इफिसियों 3:20) लेकिन आप एक ऐसे “दोस्त” के बारे में क्या सोचेंगे जो सिर्फ अपना मतलब पूरा करने के लिए आपके पास आता है? ऐसा इंसान आपकी नज़रों से गिर सकता है। उसी तरह प्रार्थना करने का जो खास वरदान हमें मिला है उसका इस्तेमाल हमें सिर्फ परमेश्‍वर से कुछ माँगने के लिए नहीं बल्कि उसका धन्यवाद और उसकी स्तुति के लिए भी करना चाहिए।—फिलिप्पियों 4:6, 7; 1 थिस्सलुनीकियों 5:17, 18.