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यहोवा के साक्षी

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संतोष से भरी ज़ंदगी—कैसे हासिल की जा सकती है

 भाग 9

संतोष से भरी ज़िंदगी का आनंद लीजिए—आज और हमेशा के लिए!

संतोष से भरी ज़िंदगी का आनंद लीजिए—आज और हमेशा के लिए!

अगर आप परमेश्‍वर के साथ दोस्ती कायम करेंगे तो आप संतोष भरी ज़िंदगी पा सकेंगे

इब्राहीम, जिसके विश्‍वास की उम्दा मिसाल बाइबल में दर्ज़ की गयी है, एक दौलतमंद शहर, ऊर में रहता था। मगर वह अपनी ऐशो-आराम की ज़िंदगी छोड़कर कुछ समय के लिए हारान में बस गया और फिर उसने अपनी बाकी ज़िंदगी किसी घर में नहीं बल्कि तंबुओं में रहनेवाले खानाबदोशों की तरह बितायी। (उत्पत्ति 12:1-3; प्रेरितों 7:2-7; इब्रानियों 11:8-10) लेकिन फिर भी बाइबल कहती है: ‘इब्राहीम दीर्घायु होकर अपनी पूर्ण वृद्धावस्था में मर गया। उसने संतुष्ट जीवन बिताया था।’ (उत्पत्ति 25:8, NHT) किस वजह से उसकी ज़िंदगी इतनी संतोष भरी थी? ऐसा नहीं कि इब्राहीम को मरते वक्‍त सिर्फ इस बात का संतोष हो कि उसने अपनी ज़िंदगी में बहुत कामयाबियाँ हासिल की थीं। अपने अटल विश्‍वास की वजह से इब्राहीम, बाद में चलकर “परमेश्‍वर का मित्र” कहलाया। (याकूब 2:23; यशायाह 41:8) इससे पता चलता है कि इब्राहीम को जीवन में इतना संतोष इसलिए मिला क्योंकि उसने अपने सिरजनहार के साथ एक गहरा रिश्‍ता कायम किया था।

क्या आपकी ज़िंदगी इब्राहीम से भी ज़्यादा संतोष भरी हो सकती है?

2 इब्राहीम की तरह जो करीब 4,000 साल पहले रहा था, अगर आप भी परमेश्‍वर के साथ दोस्ती कायम करेंगे, तो आपको भी जीने का मकसद मिल सकता है और आप संतोष भरी ज़िंदगी पा सकेंगे। आपको शायद लगे कि इस पूरे विश्‍वमंडल के सिरजनहार का दोस्त बनना हमारे बस के बाहर है मगर सच तो यह है कि ऐसी दोस्ती कायम करना मुमकिन है। कैसे? आपको सिरजनहार को जानने और उसके लिए दिल में प्यार पैदा करने की ज़रूरत है। (1 कुरिन्थियों 8:3; गलतियों  4:9) अपने सिरजनहार के साथ ऐसा रिश्‍ता बढ़ाने से आपको बहुत-सी आशीषें मिलेंगी और आप एक संतोष भरी ज़िंदगी जी सकेंगे।

3 जो लोग यीशु मसीह की छुड़ौती बलिदान को स्वीकार करते हैं, उन्हें यहोवा एक खुशहाल ज़िंदगी जीने की राह दिखाता है। (यशायाह 48:17) याद कीजिए कि आदम ने भले-बुरे का फैसला खुद करके परमेश्‍वर के खिलाफ बगावत की थी। हालाँकि यहोवा ने अपने बेटे की छुड़ौती बलिदान के ज़रिए मानव परिवार को मोल लिया है और उनके लिए पाप और मृत्यु की गुलामी से छुड़ाने का रास्ता खोल दिया है मगर फिर भी हर इंसान को चाहिए कि वह छुड़ौती के इंतज़ाम को स्वीकार करे और सही-गलत के बारे में अपनी मरज़ी के स्तर बनाना छोड़ दे। यीशु की छुड़ौती बलिदान को स्वीकार करनेवालों के लिए परमेश्‍वर ने जो नियम और सिद्धांत ठहराए हैं, उन पर चलना हमारे लिए ज़रूरी है।

“मुझे अपनी गति समझा दे”

4 जैसे-जैसे आप बाइबल का अध्ययन करेंगे और उसमें दिए गए सिद्धांतों पर अमल करेंगे, तो बेशक आप भले-बुरे के बारे में परमेश्‍वर के स्तरों की अहमियत को और भी अच्छी तरह समझने लगेंगे। (भजन 19:7-9) फिर आपका मन भी यहोवा के भविष्यवक्‍ता मूसा की तरह परमेश्‍वर से यह कहना चाहेगा: ‘अब यदि मुझ पर तेरे अनुग्रह की दृष्टि हो, तो मुझे अपनी गति समझा दे, जिस से मैं तेरा ज्ञान पाऊं।’ (निर्गमन 33:13; भजन 25:4) इस “कठिन समय” में आनेवाली समस्याओं को पार करने के लिए बाइबल में दिए गए सिद्धांतों से आपको मार्गदर्शन मिलेगा। (2 तीमुथियुस 3:1) तब आपकी कदर और भी बढ़ेगी जिससे आप यहोवा को और अच्छी तरह जान पाएँगे और उसके साथ आपकी दोस्ती गहरी होती जाएगी।

5 हालाँकि इब्राहीम ‘दीर्घायु होकर और संतुष्ट जीवन’ बिताकर मर गया, फिर भी अगर मरना तय ही है तो इंसान को दो पल का मेहमान ही कहा जाएगा। मगर हम चाहे कितने ही बूढ़े क्यों न हो जाएँ, हम सभी के अंदर जीते रहने की पैदाइशी ख्वाहिश होती है। और यह ख्वाहिश इसलिए है क्योंकि “[परमेश्‍वर] ने मनुष्यों के मन में अनादि-अनन्त काल का ज्ञान उत्पन्‍न किया है, तौभी जो काम परमेश्‍वर ने किया है, वह आदि से अन्त तक मनुष्य बूझ नहीं सकता।” (सभोपदेशक 3:11) चाहे हम अनंतकाल तक भी क्यों न जीएँ, मगर हम यहोवा की सृष्टि में छिपे सभी राज़ों को कभी-भी पूरी तरह नहीं बूझ पाएँगे। यहोवा के आश्‍चर्यकर्मों को देखने, उनका अध्ययन करने और उनका आनंद लेने का कोई अंत नहीं!—भजन 19:1-4; 104:24; 139:14.

6 आज हम धरती पर चारों तरफ जो समस्याएँ देखते हैं, वे अगर यूँ ही बनी रहें, तो शायद ही आप हमेशा की ज़िंदगी जीना पसंद करेंगे। मगर  ऐसा सोचकर आपको परेशान होने की ज़रूरत नहीं क्योंकि बाइबल वादा करती है: “उस की प्रतिज्ञा के अनुसार हम एक नए आकाश और नई पृथ्वी की आस देखते हैं जिन में धार्मिकता बास करेगी।” (2 पतरस 3:13) “नए आकाश” का मतलब स्वर्ग की नयी सरकार यानी परमेश्‍वर का राज्य है जो सारी पृथ्वी पर शासन करेगा। “नई पृथ्वी” ऐसे इंसानों से बना एक नया समाज है जो उस राज्य के अधीन रहेगा। यहोवा अपने इस वादे को पूरा करने के लिए जल्द ही उन लोगों के खिलाफ कार्यवाही करनेवाला है जो ‘पृथ्वी को बिगाड़ रहे हैं।’—प्रकाशितवाक्य 11:18; 2 पतरस 3:10.

7 यह सब कितनी जल्दी होगा? यीशु मसीह ने “जगत के अन्त का . . . चिन्ह” बताते हुए कहा कि उस वक्‍त देश-देश के बीच युद्ध, ‘जगह जगह अकाल और भुईंडोल’ होंगे, “मरियां” पड़ेंगी और ‘अधर्म बढ़ जाएगा।’ (मत्ती 24:3-13; लूका 21:10, 11; 2 तीमुथियुस 3:1-5) इसके बाद उसने भविष्यवाणी की: “जब तुम ये बातें होते देखो, तब जान लो कि परमेश्‍वर का राज्य निकट है।” (लूका 21:31) बेशक, दुष्टों को नाश करने के लिए यहोवा का समय बहुत तेज़ी से पास आता जा रहा है। *

8 “सर्वशक्‍तिमान परमेश्‍वर के उस बड़े दिन की लड़ाई” के बाद, यहोवा पृथ्वी पर से दुष्टता को मिटा देगा। इसके बाद हमारी यह धरती फिरदौस में बदल दी जाएगी। (प्रकाशितवाक्य 16:14, 16; यशायाह 51:3) फिर, “धर्मी लोग पृथ्वी के अधिकारी होंगे, और उस में सदा बसे रहेंगे।” (भजन 37:29) लेकिन जो लोग मर गए हैं, उनके बारे में क्या कहा जा सकता है? यीशु ने कहा: “इस से अचम्भा मत करो, क्योंकि वह समय आता है, कि जितने कब्रों में हैं, उसका शब्द सुनकर निकलेंगे। जिन्हों ने भलाई की है वे जीवन के पुनरुत्थान के लिये जी उठेंगे और जिन्हों ने बुराई की है वे दंड के पुनरुत्थान के लिये जी उठेंगे।” (यूहन्‍ना 5:28, 29) यहोवा, जो हर इंसान को प्यार करता है, वह उन लोगों को दोबारा ज़िंदगी देना चाहता है जो आज मौत की नींद सो रहे हैं। वैज्ञानिक, क्लोनिंग यानी जॆनॆटिक इंजीनियरिंग के ज़रिए शायद इंसानों का हमशक्ल तैयार करने की कोशिश करें मगर सिरजनहार को यह तरीका अपनाने की कोई ज़रूरत नहीं। वह उद्धार पाने के योग्य हर इंसान के बारे में बारीक-से-बारीक  जानकारी याद रखने की काबिलीयत रखता है और उन्हें दोबारा ज़िंदा भी कर सकता है। जी हाँ, आप यह उम्मीद रख सकते हैं कि आपके जो अपने मर गए हैं उनसे आप इसी धरती पर एक फिरदौस में दोबारा मिल सकेंगे!

9 उस फिरदौस में जीवन कैसा होगा? उस वक्‍त धरती पर रहनेवाला हर आदमी-औरत सुखी होगा और सब मिलकर सिरजनहार की स्तुति करेंगे। “कोई निवासी न कहेगा कि मैं रोगी हूं।” (यशायाह 33:24; 54:13) कोई भी इंसान ज़िंदगी की परेशानियों से दुःखदायी तनाव महसूस नहीं करेगा, न ही उसे भावात्मक और मानसिक विकार होंगे। सभी के पास खाने-पीने को बहुतायत में होगा और वे परमेश्‍वर के उद्देश्‍य के मुताबिक जीते हुए अपने काम से खुशी पाएँगे। (भजन 72:16; यशायाह 65:23) वे जानवरों, दूसरे इंसानों और सबसे बढ़कर “परमेश्‍वर के साथ मेल” से जीने का आनंद ले पाएँगे।—रोमियों 5:1; भजन 37:11; 72:7; यशायाह 11:6-9.

10 उस फिरदौस में रहने और संतोष से भरी एक ज़िंदगी का आनंद पाने के लिए आपको क्या करना चाहिए? यीशु मसीह ने कहा: “अनन्त जीवन यह है, कि वे तुझ अद्वैत सच्चे परमेश्‍वर को और यीशु मसीह को, जिसे तू ने भेजा है, जानें।” (यूहन्‍ना 17:3) इसलिए यहोवा परमेश्‍वर और यीशु मसीह के बारे में ज्ञान लेते रहिए और सीखिए कि परमेश्‍वर आपसे क्या चाहता है। तब आप यहोवा परमेश्‍वर को खुश कर पाएँगे और आपकी ज़िंदगी सचमुच संतोष से भर जाएगी।

^ पैरा. 7 इस भविष्यवाणी के बारे में आप बाइबल असल में क्या सिखाती है? किताब के अध्याय 9 से और ज़्यादा सीख सकते हैं। इसे यहोवा के साक्षियों ने प्रकाशित किया है।