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यहोवा के साक्षी

हिंदी

बाइबल असल में क्या सिखाती है?

 अध्याय उन्नीस

परमेश्वर के प्रेम में बने रहिए

परमेश्वर के प्रेम में बने रहिए
  • परमेश्वर से प्यार करने का क्या मतलब है?

  • हम परमेश्वर के प्यार में कैसे बने रह सकते हैं?

  • जो यहोवा के प्यार में बने रहते हैं उन्हें वह कैसे इनाम देगा?

क्या आप मुसीबतों के तूफान में यहोवा की पनाह लेंगे?

1, 2. आज हमें पनाह कहाँ मिल सकती है?

मान लीजिए आप सड़क पर चले जा रहे हैं। मौसम देखकर लगता है कि तूफान आनेवाला है। फिर देखते-ही-देखते आसमान में काली घटाएँ छाने लगती हैं। बिजलियाँ कड़कने लगती हैं और बादलों की तेज़ गर्जन से कान फटने लगते हैं। और फिर मूसलाधार बारिश होने लगती है। आप यहाँ-वहाँ भागते हैं और सिर छिपाने की जगह ढूँढ़ते हैं। तभी आपको सड़क के किनारे एक घर नज़र आता है। यह एक मज़बूत मकान है, जिसमें पनाह लेकर आप तूफान से बच सकते हैं। इस मकान से मिलनेवाली हिफाज़त के लिए आप कितने एहसानमंद होंगे!

2 आज हम भी मुसीबतों के तूफान में घिरे हुए हैं। दुनिया के हालात बद-से-बदतर होते जा रहे हैं। मगर हमारे लिए भी एक पनाह मौजूद है, जिसकी हिफाज़त में रहने से हमें ऐसा कोई नुकसान नहीं होगा, जिसकी भरपाई न की जा सके। वह पनाह क्या है? गौर कीजिए कि बाइबल क्या सिखाती है: “मैं यहोवा के विषय कहूंगा, कि वह मेरा शरणस्थान और गढ़ है; वह मेरा परमेश्वर है, मैं उस पर भरोसा रखूंगा।”भजन 91:2.

3. हम यहोवा की पनाह में कैसे आ सकते हैं?

3 यह क्या ही हैरतअँगेज़ बात है कि पूरे जहान को बनानेवाला, महाराजाधिराज यहोवा हमें पनाह दे सकता है! हम उसकी पनाह में सही-सलामत रह सकते हैं, क्योंकि वह ऐसे हर प्राणी और ऐसी हर चीज़ से कहीं ज़्यादा ताकतवर है,  जो हमें नुकसान पहुँचा सकती है। चाहे हमारे साथ कितनी ही बुराई क्यों न हुई हो और हमने कितने ही गम क्यों न झेले हों, यहोवा हमारे हर घाव को भर सकता है और उसके हर बुरे अंजाम को मिटा सकता है। हम यहोवा की पनाह में कैसे आ सकते हैं? हमें उस पर पूरा भरोसा रखना होगा। यही नहीं, परमेश्वर का वचन हमसे गुज़ारिश करता है: “अपने आप को परमेश्वर के प्रेम में बनाए रखो।” (यहूदा 21) जी हाँ, हमें परमेश्वर के प्रेम में बने रहना होगा, यानी अपने स्वर्गीय पिता के साथ प्यार का एक मज़बूत रिश्ता कायम रखना होगा। तभी हम पक्का यकीन रख सकते हैं कि यहोवा हमारा शरणस्थान है। मगर हम यह रिश्ता कैसे कायम कर सकते हैं?

परमेश्वर के प्यार को पहचानिए और उसके लिए कदर दिखाइए

4, 5. ऐसे कुछ तरीके क्या हैं जिनसे यहोवा ने हमारे लिए प्यार दिखाया है?

4 यहोवा के प्यार में बने रहने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि उसने किन तरीकों से हमें प्यार दिखाया है। ज़रा सोचिए, आपने इस किताब की मदद से परमेश्वर के प्यार के बारे में बाइबल से क्या-क्या सीखा है। आपने जाना है कि सिरजनहार यहोवा ने हमारे रहने के लिए यह खूबसूरत धरती बनायी है। उसने इस धरती को तरह-तरह की खाने-पीने की चीज़ों, हवा-पानी और कुदरती साधनों से मालामाल किया है। उसने मन को मोहनेवाले परिंदे और जीव-जंतु, साथ ही दिलकश नज़ारे भी बनाए हैं। आपने यह भी सीखा है कि परमेश्वर ने हमारे लिए बाइबल लिखवायी है और उसमें अपना नाम और अपने अलग-अलग गुण बताए हैं। यही नहीं, परमेश्वर ने अपने वचन में बताया है कि उसने हमें एक नायाब तोहफा दिया है। उसने अपने प्यारे बेटे यीशु को धरती पर भेजा ताकि वह हमारे लिए दुःख सहे और अपनी जान कुरबान करे। (यूहन्ना 3:16) परमेश्वर का यह तोहफा हमारे लिए क्या मायने रखता है? यह हमें एक शानदार भविष्य की आशा देता है।

5 भविष्य की हमारी इस आशा को पूरा करने के लिए परमेश्वर ने एक और इंतज़ाम किया है। उसने स्वर्ग में एक सरकार बनायी है, जिसे मसीहाई राज्य कहा जाता है। यह सरकार बहुत जल्द दुनिया के तमाम दुःखों को मिटा देगी और धरती को एक फिरदौस बनाएगी। ज़रा सोचिए! उस खूबसूरत फिरदौस में हम हमेशा के लिए शांति और खुशी से जी सकेंगे। (भजन 37:29) यह तो भविष्य की बात हुई, लेकिन आज भी परमेश्वर हमें सिखा रहा है कि हम एक बेहतरीन ज़िंदगी कैसे जी सकते हैं। उसने हमें प्रार्थना का वरदान भी दिया है, जिसके ज़रिए हम किसी भी वक्‍त और कहीं पर भी उससे बात कर सकते हैं। यहोवा ने और भी कई तरीकों से सब इंसानों के लिए प्यार दिखाया है, जी हाँ, आपके लिए भी।

6. यहोवा ने आपके लिए जो प्यार दिखाया है, उसके लिए आप कदर कैसे दिखा सकते हैं?

 6 अब आपको इस ज़रूरी सवाल का जवाब देना है: मैं यहोवा के प्यार के लिए कदर कैसे दिखाऊँ? कई लोग जवाब देंगे, “बदले में मुझे भी यहोवा से प्यार करना चाहिए।” क्या आप भी ऐसा ही महसूस करते हैं? यीशु ने कहा था कि सबसे बड़ी आज्ञा यह है: “तू परमेश्वर [यहोवा] अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख।” (मत्ती 22:37) यहोवा परमेश्वर से प्यार करने की बेशक आपके पास कई वजह हैं। मगर क्या यहोवा को अपने सारे मन, प्राण और बुद्धि से प्यार करने का मतलब बस इतना है कि आपके दिल में उसके लिए प्यार की सिर्फ एक भावना हो?

7. क्या परमेश्वर से प्यार करने का मतलब, उसके लिए प्यार की सिर्फ भावना रखना है? समझाइए।

7 बाइबल में समझाया गया है कि यहोवा के लिए दिल में प्यार महसूस करना काफी नहीं है। हालाँकि इस भावना का होना ज़रूरी है, मगर यह सच्चे प्यार की महज़ एक शुरूआत है। इसे समझने के लिए आइए एक मिसाल लें। सेब का पेड़ उगाने के लिए सेब का बीज ज़रूरी होता है। लेकिन अगर आप किसी से पूरा सेब माँगें और वह आपके हाथ में सिर्फ सेब का बीज थमा दे, तो क्या आप खुश होंगे? बिलकुल नहीं! उसी तरह यहोवा के लिए सिर्फ प्यार की भावना होना काफी नहीं, यह तो बस एक शुरूआत है। वह हमसे पूरा और सच्चा प्यार चाहता है। यह प्यार कैसे दिखाया जाता है? बाइबल सिखाती है: “परमेश्वर का प्रेम यह है, कि हम उस की आज्ञाओं को मानें; और उस की आज्ञाएं कठिन नहीं।” (1 यूहन्ना 5:3) इसका मतलब है कि परमेश्वर के लिए सच्चा प्यार हमारे अच्छे फलों से यानी हमारे कामों से दिखायी देगा।मत्ती 7:16-20.

8, 9. हम परमेश्वर के लिए प्यार और कदरदानी कैसे दिखा सकते हैं?

8 परमेश्वर को प्यार दिखाने के लिए हमें उसकी आज्ञाएँ माननी चाहिए और उसके बताए सिद्धांतों पर चलना चाहिए। ऐसा करना बहुत मुश्किल नहीं। यहोवा ने हमें जो कायदे-कानून दिए हैं वे हमारे लिए बोझ नहीं हैं। इसके बजाय, इन कानूनों को मानने से हम एक बेहतर ज़िंदगी जी पाते हैं जिससे हमें खुशियाँ और सुख मिलता है। (यशायाह 48:17, 18) यहोवा की हिदायतों पर चलना दिखाएगा कि हम उसके हर एहसान की सचमुच कदर करते हैं। बड़े दुःख की बात है  कि आज दुनिया में बहुत कम लोग परमेश्वर के उपकारों के लिए उसका एहसान मानते हैं। मगर हम एहसानफरामोश नहीं होना चाहते, जैसे यीशु के ज़माने में कुछ लोग थे। एक बार यीशु ने दस कोढ़ियों को चंगा किया था, मगर उनमें से सिर्फ एक आदमी ने लौटकर उसका शुक्रिया अदा किया। (लूका 17:12-17) यकीनन, हम उस एक आदमी की तरह एहसानमंद होना चाहते हैं, बाकी नौ की तरह एहसानफरामोश नहीं!

9 तो फिर यहोवा की वे आज्ञाएँ क्या हैं जो हमें माननी चाहिए? हमने इस किताब में उसकी कई आज्ञाओं के बारे में सीखा है, मगर आइए अब उनमें से कुछेक पर फिर से गौर करें। परमेश्वर की आज्ञाएँ मानने से हमें उसके प्यार में बने रहने में मदद मिलेगी।

दिनोंदिन यहोवा के करीब आइए

10. यहोवा परमेश्वर के बारे में ज्ञान लेते रहना क्यों ज़रूरी है, समझाइए।

10 यहोवा के करीब आने में एक ज़रूरी कदम है, उसके बारे में सीखते रहना। यह एक ऐसा काम है जो कभी रुकना नहीं चाहिए। मान लीजिए, अगर आप रात को बाहर कड़ाके की ठंड में आग के सामने हाथ ताप रहे हों, तो क्या आप उस आग की लपटों को बुझने देंगे? बिलकुल नहीं। इसके  बजाय, आप आग को तेज़ करने के लिए उसमें लकड़ियाँ डालते रहेंगे। आग की यही गर्मी आपकी जान बचाएगी! जैसे आग जलाए रखने के लिए लकड़ियों की ज़रूरत होती है, वैसे ही यहोवा के लिए प्यार की लौ जलाए रखने के लिए ‘उसका ज्ञान’ लेते रहना ज़रूरी है।नीतिवचन 2:1-5.

जैसे आग के लिए लकड़ी, वैसे ही यहोवा के प्यार की लौ जलाए रखने के लिए ज्ञान ज़रूरी है

11. यीशु ने जब चेलों को सिखाया तो इसका उन पर क्या असर हुआ?

11 यीशु चाहता था कि उसके चेलों में यहोवा के लिए और उसके अनमोल वचन के लिए प्यार हमेशा बना रहे और उनके दिलों में एक मशाल की तरह जलता रहे। गौर कीजिए कि यीशु ने पुनरुत्थान के बाद जब दो चेलों को सिखाया कि इब्रानी शास्त्र की कुछ भविष्यवाणियाँ उसमें किस तरह पूरी हुईं, तो उन पर इसका क्या असर हुआ। उन्होंने कहा: “राह में जब वह हमसे बातें कर रहा था और हमें शास्त्रों को समझा रहा था तो क्या हमारे हृदय के भीतर आग सी नहीं भड़क उठी थी?”लूका 24:32, ईज़ी-टू-रीड वर्शन।

12, 13. (क) परमेश्वर और बाइबल के लिए ज़्यादातर लोगों के प्यार को क्या हो गया है? (ख) हम क्या कर सकते हैं ताकि हमारा प्यार ठंडा न पड़ जाए?

12 जब आपने पहली बार समझा कि बाइबल असल में क्या सिखाती है, तो क्या आपको खुशी नहीं हुई और क्या परमेश्वर के लिए आपके दिल में जोश और प्यार नहीं उमड़ आया? ज़रूर उमड़ आया होगा। बहुत-से लोगों ने ऐसा महसूस किया है। मगर अब आपको इस गहरे प्यार को कायम रखना है और इसे बढ़ाते भी जाना है, जो कि मुश्किल हो सकता है। हम इस दुनिया के लोगों जैसे नहीं होना चाहते, जिनके बारे में यीशु ने भविष्यवाणी की थी: “बहुतों का प्रेम ठण्डा हो जाएगा।” (मत्ती 24:12) यहोवा और बाइबल की सच्चाइयों के लिए आपका प्यार ठंडा न पड़ जाए, इसके लिए आप क्या कर सकते हैं?

13 यहोवा परमेश्वर और यीशु मसीह के बारे में ज्ञान लेते रहिए। (यूहन्ना 17:3) साथ ही, बाइबल से आप जो सीखते हैं, उस पर गहराई से सोचिए यानी मनन कीजिए। ऐसा करने के लिए खुद से ये सवाल पूछिए: ‘इस जानकारी से मैं यहोवा परमेश्वर के बारे में क्या सीख सकता हूँ? इसमें कौन-से कारण बताए गए हैं जो मुझे पूरे मन, प्राण और बुद्धि से उसे प्यार करने के लिए उकसाते हैं?’ (1 तीमुथियुस 4:15) इस तरह मनन करने से यहोवा के लिए आपके प्यार की मशाल हमेशा जलती रहेगी।

14. अपने दिल में यहोवा के लिए प्यार की मशाल रोशन रखने में प्रार्थना कैसे हमारी मदद करती है?

14 आपके दिल में यहोवा के लिए प्यार की मशाल रोशन रहे, इसके लिए उससे  हर रोज़ और बार-बार प्रार्थना कीजिए। (1 थिस्सलुनीकियों 5:17) इस किताब के 17वें अध्याय में हमने सीखा था कि प्रार्थना परमेश्वर से मिला एक अनमोल वरदान है। जैसे इंसानी रिश्तों को मज़बूत बनाए रखने के लिए खुलकर और लगातार बातचीत करना ज़रूरी होता है, उसी तरह यहोवा के साथ मज़बूत रिश्ता बनाए रखने के लिए हमें उससे रोज़ और बार-बार प्रार्थना करनी चाहिए। इस बात का ध्यान रखना भी ज़रूरी है कि हमारी प्रार्थनाएँ कहीं एक ढर्रा न बन जाएँ, यानी हम बिना किसी भावना के और बेमतलब बार-बार उन्हीं शब्दों को न दोहराएँ। हमें यहोवा से ऐसे बात करनी चाहिए जैसे एक बच्चा अपने पिता से करता है। बेशक हम इज़्ज़त से पेश आएँगे, मगर हम खुलकर अपने दिल की हर बात उससे कहेंगे। (भजन 62:8) जी हाँ, निजी बाइबल अध्ययन और सच्चे दिल से प्रार्थना करना, हमारी उपासना के खास पहलू हैं और ये हमें परमेश्वर के प्यार में बने रहने में मदद देते हैं।

परमेश्वर की उपासना में खुशी पाइए

15, 16. हमें राज्य का प्रचार करने की ज़िम्मेदारी को क्यों एक सुनहरा मौका और धन समझना चाहिए?

15 निजी बाइबल अध्ययन और प्रार्थना से हम अकेले में परमेश्वर की उपासना करते हैं। मगर अब आइए एक और पहलू पर गौर करें जिसमें हम सरेआम परमेश्वर की उपासना करते हैं: दूसरों को अपने विश्वासों के बारे में बताकर। क्या आपने बाइबल की सच्चाइयाँ दूसरों को बताना शुरू कर दिया है? अगर हाँ, तो आपको परमेश्वर की सेवा करने का सुनहरा मौका मिला है। (लूका 1:74,75) यहोवा परमेश्वर के बारे में जो सच्चाइयाँ हमने सीखी हैं, उन्हें दूसरों को बताकर हम ऐसा खास काम पूरा करते हैं, जो हरेक सच्चे मसीही को सौंपा गया है। वह क्या है? वह है, परमेश्वर के राज्य की खुशखबरी सुनाना।मत्ती 24:14; 28:19, 20.

16 प्रेरित पौलुस ने प्रचार की अपनी ज़िम्मेदारी को बहुत अनमोल समझा और उसे एक धन कहा। (2 कुरिन्थियों 4:7) भला क्यों? क्योंकि यहोवा परमेश्वर और उसके उद्देश्यों के बारे में दूसरों को बताना दुनिया का सबसे महान काम है। यह काम करके आप पूरे जहान के सबसे अच्छे मालिक, यहोवा की सेवा करते हैं और इससे जो फायदे मिलते हैं वह किसी और काम से नहीं मिल सकते। इस सेवा में हिस्सा लेकर आप नेकदिल लोगों को हमारे स्वर्गीय पिता के करीब आने और उस राह पर चलने में मदद देते हैं जिससे वे हमेशा की ज़िंदगी पा सकते हैं। दुनिया का  भला और कौन-सा काम इतना सुकून और मन की शांति दे सकता है! इतना ही नहीं, यहोवा और उसके वचन के बारे में गवाही देने से आपका विश्वास भी मज़बूत होता है और यहोवा के लिए आपका प्यार बढ़ता रहता है। और यहोवा खुद आपकी मेहनत की कदर करता है। (इब्रानियों 6:10) इस काम में लगे रहना, आपको परमेश्वर के प्यार में बने रहने में मदद करेगा।1 कुरिन्थियों 15:58.

17. आज मसीहियों के लिए प्रचार का काम करना क्यों बेहद ज़रूरी है?

 17 याद रखिए कि आज हम ऐसे दौर में जी रहे हैं, जब राज्य का प्रचार करना बेहद ज़रूरी है। बाइबल कहती है: “वचन का प्रचार कर, यह काम जल्द-से-जल्द पूरा कर।” (2 तीमुथियुस 4:2, NW) हमें इस काम को जल्द-से-जल्द क्यों करना है? बाइबल कहती है: “यहोवा का भयानक दिन निकट है, वह बहुत वेग से समीप चला आता है।” (सपन्याह 1:14) जी हाँ, वह वक्‍त तेज़ी से पास आ रहा है जब यहोवा इस दुनिया की पूरी व्यवस्था को मिटा देगा। इसलिए लोगों को खबरदार करना ज़रूरी है! उन्हें यह जानने की ज़रूरत है कि यही वह मौका है जब वे यहोवा को अपना मालिक कबूल करने का फैसला कर सकते हैं। अंत आने में ज़रा भी “देर न होगी।”हबक्कूक 2:3.

18. हमें सच्चे मसीहियों के साथ इकट्ठा होकर सरेआम यहोवा की उपासना क्यों करनी चाहिए?

18 यहोवा यह भी चाहता है कि हम सच्चे मसीहियों के साथ इकट्ठा होकर सरेआम उसकी उपासना करें। इसीलिए उसका वचन कहता है: “प्रेम, और भले कामों में उस्काने के लिये एक दूसरे की चिन्ता किया करें। और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना न छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो।” (इब्रानियों 10:24, 25) जब हम सभाओं में अपने मसीही भाई-बहनों के साथ इकट्ठे होते हैं, तो हमें अपने प्यारे परमेश्वर की बड़ाई करने और उसकी उपासना करने का बढ़िया मौका मिलता है। ऐसी सभाओं में हम एक-दूसरे का हौसला और हिम्मत भी बँधाते हैं।

19. हम मसीही कलीसिया में प्यार के बंधन को कैसे मज़बूत कर सकते हैं?

19 जब हम कलीसिया में यहोवा के दूसरे सेवकों के साथ संगति करते हैं, तो हमारे बीच प्यार और दोस्ती का बंधन मज़बूत होता है। इसके लिए ज़रूरी है कि हम एक-दूसरे की अच्छाइयों पर ध्यान दें, ठीक जैसे यहोवा भी हमारे अंदर अच्छाइयाँ देखता है। यह उम्मीद मत कीजिए कि हमारे मसीही भाई-बहन कभी कोई गलती नहीं करेंगे। इसके बजाय, याद रखिए कि आध्यात्मिक तरक्की में हर कोई अलग-अलग है, कुछ काफी आगे बढ़ चुके हैं तो कुछ को आगे बढ़ने की ज़रूरत है, और गलतियाँ हम सबसे होती हैं। (कुलुस्सियों 3:13) ऐसे लोगों से दोस्ती बढ़ाइए जो यहोवा से बेहद प्यार करते हैं, तब आपको खुद आध्यात्मिक तरक्की करने में मदद मिलेगी। जी हाँ, मसीही भाई-बहनों के साथ मिलकर यहोवा की उपासना कीजिए। इस तरह आप परमेश्वर के प्यार में बने रहेंगे। जो लोग  यहोवा की सेवा वफादारी से करते हैं और उसके प्यार में बने रहते हैं, उन्हें वह क्या इनाम देगा?

“सच्ची ज़िन्दगी” पाने के लिए आगे बढ़िए

20, 21. “सच्ची ज़िन्दगी” क्या है, और इससे बढ़िया कोई और आशा क्यों नहीं हो सकती?

20 यहोवा परमेश्वर अपने वफादार सेवकों को बतौर इनाम ज़िंदगी देगा। किस तरह की ज़िंदगी? ज़रा सोचिए, क्या आप अभी सचमुच जी रहे हैं? हममें से ज़्यादातर लोग कहेंगे कि यह भी कोई पूछने की बात है, हम साँस ले रहे हैं, खा-पी रहे हैं, तो क्या हम ज़िंदा नहीं? और जब हमारी ज़िंदगी में खुशी के पल आते हैं, तो हम शायद यह भी कहें, “यही तो जीने का असली मज़ा है!” मगर बाइबल दिखाती है कि आज कोई भी इंसान सही मायनों में ज़िंदा नहीं है।

यहोवा चाहता है कि आप नयी दुनिया में “सच्ची ज़िन्दगी” का मज़ा लें। क्या आप वहाँ होंगे?

21 परमेश्वर का वचन हमसे गुज़ारिश करता है कि हम “सच्ची ज़िन्दगी पर कब्ज़ा करें।” (1 तीमुथियुस 6:19, हिन्दुस्तानी बाइबल) ये शब्द दिखाते हैं कि अब तक हमने “सच्ची ज़िन्दगी” पर कब्ज़ा नहीं किया है, मगर भविष्य में इसे हासिल करने की उम्मीद करते हैं। जी हाँ, जब हम सिद्ध होंगे तब हम सचमुच में जानेंगे कि असली ज़िंदगी किसे कहते हैं, क्योंकि तब हमारी ज़िंदगी बिलकुल वैसी होगी जैसी परमेश्वर ने शुरू में चाही थी। फिरदौस में जब हम पूरी तरह तंदुरुस्त होंगे, चारों तरफ शांति और खुशियाँ होंगी, तब जाकर हम सही मायनों में “सच्ची ज़िन्दगी” का मज़ा ले रहे होंगे, जी हाँ, हमेशा की ज़िंदगी का। (1 तीमुथियुस 6:12) क्या भविष्य के लिए इससे बढ़िया कोई और आशा हो सकती है?

22. आप “सच्ची ज़िन्दगी पर कब्ज़ा” कैसे कर सकते हैं?

22 हम उस “सच्ची ज़िन्दगी पर कब्ज़ा” कैसे कर सकते हैं? बाइबल की इसी किताब में पौलुस ने मसीहियों को उकसाया था कि ऐसी ज़िंदगी पर कब्ज़ा पाने के लिए वे “भलाई करें, और भले कामों में धनी बनें।” (1 तीमुथियुस 6:18) इससे पता चलता है कि हम सच्ची ज़िंदगी पर कब्ज़ा कर पाएँगे या नहीं, यह काफी हद तक इस बात से तय होता है कि हम भले काम करें यानी बाइबल से सीखी सच्चाइयों पर सही तरह से अमल करें। मगर क्या पौलुस यह कह रहा था कि हम भलाई के काम करके अपने बलबूते पर “सच्ची ज़िन्दगी” कमा सकते हैं? नहीं, क्योंकि यह बेहतरीन आशीष ‘परमेश्वर के अनुग्रह’ से मिलनेवाला एक तोहफा है, जिसे पाने के हम हकदार नहीं हैं। (रोमियों 5:15) फिर भी, यहोवा सिर्फ उन लोगों को यह इनाम देता है जो वफादारी से उसकी सेवा करते हैं। वह चाहता है कि आप भी उन लोगों में हों जो “सच्ची ज़िन्दगी” का मज़ा लेंगे। जी हाँ, जो परमेश्वर के  प्यार में बने रहेंगे, वे हमेशा-हमेशा के लिए खुशियों से भरी, अमन-चैन की ज़िंदगी जीएँगे।

23. परमेश्वर के प्यार में बने रहना क्यों ज़रूरी है?

23 हर किसी को खुद से पूछना चाहिए, ‘क्या मैं परमेश्वर की उपासना ठीक उसी तरीके से कर रहा हूँ जैसा बाइबल सिखाती है?’ अगर हम हर दिन खुद को जाँचें कि हम परमेश्वर की उपासना उसकी मरज़ी के हिसाब से कर रहे हैं या नहीं, तो हम सही राह पर चलते रहेंगे। हम पूरा भरोसा रख सकेंगे कि यहोवा हमारा शरणस्थान है। यहोवा, अपने वफादार लोगों को इस पुरानी दुनिया के खौफनाक अंतिम दिनों से बचाकर ले चलेगा और उस शानदार नयी दुनिया में पहुँचाएगा जो बहुत करीब है। आखिरकार जब हम उस दुनिया में कदम रखेंगे जिसके लिए हम बरसों से तरस रहे हैं, तो सोचिए हम कैसे खुशी से झूम उठेंगे! और हमें इस बात से भी कितनी खुशी होगी कि अंतिम दिनों के दौरान हमने बिलकुल सही फैसले किए थे! अगर अभी आप सच्चे परमेश्वर की उपासना करने का फैसला करें तो आप हमेशा-हमेशा के लिए “सच्ची ज़िन्दगी” का मज़ा ले पाएँगे। जी हाँ, ऐसी ज़िंदगी जो हमारे प्यारे परमेश्वर यहोवा ने हमारे लिए शुरू से चाही थी।