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यहोवा के साक्षी

हिंदी

बाइबल हमें क्या सिखाती है?

 अध्याय एक

परमेश्वर कौन है?

परमेश्वर कौन है?

1, 2. लोग अकसर कौन-से सवाल पूछते हैं?

बच्चे बहुत सवाल करते हैं। आप चाहें उन्हें जितना समझाएँ, उनका अगला सवाल हमेशा यही होता है, ‘क्यों?’

2 बच्चों के ही नहीं, हम बड़ों के भी कुछ-न-कुछ सवाल होते हैं। हम शायद खाने-पीने या कुछ खरीदने के बारे में सवाल करें। इसके अलावा, जीवन और भविष्य को लेकर भी हमारे मन में कुछ ज़रूरी सवाल उठ सकते हैं। लेकिन जब हमें इनके सही जवाब नहीं मिलते तो हम ये सवाल पूछना छोड़ देते हैं।

3. कई लोगों को क्यों लगता है कि वे अपने ज़रूरी सवालों के जवाब नहीं पा सकते?

3 क्या इन ज़रूरी सवालों के जवाब पाए जा सकते हैं? कई लोगों का कहना है, ‘नहीं! क्योंकि इनके जवाब सिर्फ परमेश्वर के पास हैं और हम इंसानों को उससे कुछ भी पूछने का हक नहीं।’ दूसरे कहते हैं, ‘इन सवालों के जवाब सिर्फ धर्म गुरु जानते हैं।’ कुछ ऐसे भी हैं जो इस डर से सवाल नहीं पूछते कि कहीं लोग उनकी हँसी न उड़ाएँ। इस बारे में आप क्या सोचते हैं?

4, 5. (क) आप किन ज़रूरी सवालों के जवाब जानना चाहते हैं? (ख) आपको क्यों इनके जवाब ढूँढ़ते रहना चाहिए?

4 आप शायद इन सवालों के जवाब जानना चाहें: मेरी ज़िंदगी का मकसद क्या है? मरने के बाद क्या होता है? परमेश्वर कैसा है? एक मशहूर शिक्षक, यीशु ने कहा, “माँगते रहो तो तुम्हें दिया जाएगा, ढूँढ़ते रहो तो तुम पाओगे, खटखटाते रहो तो तुम्हारे लिए खोला जाएगा।” (मत्ती 7:7) इसलिए जब तक आपको अपने सवालों के सही जवाब नहीं मिल जाते तब तक इन्हें ढूँढ़ते रहिए।

5 लेकिन आप इन सवालों के जवाब कहाँ ढूँढ़ सकते हैं? पवित्र शास्त्र  बाइबल में। (नीतिवचन 2:1-5) और इन जवाबों को समझना मुश्किल नहीं। यही नहीं, इन्हें जानने से आज आपको सच्ची खुशी और भविष्य के लिए एक अच्छी आशा भी मिलेगी। अब आइए एक ऐसे सवाल पर ध्यान दें जिसने कई लोगों को उलझन में डाल रखा है।

क्या परमेश्वर हमारी परवाह करता है या वह पत्थरदिल है?

6. कुछ लोगों को क्यों लगता है कि परमेश्वर को हमारी कोई परवाह नहीं?

6 कुछ लोगों को लगता है कि परमेश्वर को हमारी कोई परवाह नहीं। वे सोचते हैं कि अगर उसे हमारी परवाह होती तो आज दुनिया की यह हालत न होती। जहाँ देखो वहाँ लड़ाइयाँ हो रही हैं, लोग एक-दूसरे से नफरत करते हैं और मुसीबतें-ही-मुसीबतें हैं। लोग बीमार पड़ते हैं, दर्द से गुज़रते हैं और फिर मर जाते हैं। इसलिए कुछ सोचते हैं, ‘अगर परमेश्वर को हमारी परवाह है तो वह इन तकलीफों को दूर क्यों नहीं करता?’

7. (क) धर्म गुरु किस तरह यह सिखाते हैं कि परमेश्वर पत्थरदिल है? (ख) हम क्यों यकीन रख सकते हैं कि बुरी घटनाओं के पीछे परमेश्वर का हाथ नहीं है?

7 इसके अलावा, कई लोग धर्म गुरुओं के कहने पर यह मान लेते हैं कि परमेश्वर पत्थरदिल है। जब कोई हादसा होता है तो धर्म गुरु कहते हैं कि परमेश्वर की यही मरज़ी थी। यह कहकर वे सारी मुसीबतों के लिए परमेश्वर को दोषी ठहराते हैं। मगर बाइबल सिखाती है कि परमेश्वर कभी-भी बुरा नहीं करता। याकूब 1:13 में लिखा है, “जब किसी की परीक्षा हो रही हो तो वह यह न कहे, ‘परमेश्वर मेरी परीक्षा ले रहा है।’ क्योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा ली जा सकती है, न ही वह खुद बुरी बातों से किसी की परीक्षा लेता है।” इस आयत से साफ पता चलता है कि बुरी घटनाओं के पीछे परमेश्वर का हाथ नहीं है। लेकिन यह भी सच है कि आज परमेश्वर बुराई को नहीं रोकता। तो क्या इसका मतलब है कि वह इन बुराइयों के लिए ज़िम्मेदार है? नहीं। (अय्यूब 34:10-12 पढ़िए।) इसे समझने के लिए एक उदाहरण लीजिए।

8, 9. हमारी समस्याओं के लिए परमेश्वर को दोषी ठहराना क्यों सही नहीं होगा? एक उदाहरण दीजिए।

 8 एक परिवार में एक जवान लड़का है। लड़के का पिता उससे बहुत प्यार करता है। उसने उसे सिखाया है कि सही फैसले कैसे करने चाहिए। मगर एक दिन लड़का पिता के खिलाफ हो जाता है और घर छोड़कर चला जाता है। वह बुरे-से-बुरा काम करता है और मुश्किल में पड़ जाता है। क्या आप इसके लिए पिता को ज़िम्मेदार मानेंगे क्योंकि घर छोड़ते वक्‍त उसने अपने बेटे को नहीं रोका था? बिलकुल नहीं! (लूका 15:11-13) ठीक इसी तरह, जब इंसान परमेश्वर के खिलाफ हो गए और बुरे काम करने लगे तो परमेश्वर ने भी उन्हें नहीं रोका। इसलिए जब कुछ बुरा होता है तो हमें याद रखना चाहिए कि उसके पीछे परमेश्वर का हाथ नहीं है। उसे दोषी ठहराना सरासर गलत होगा।

9 परमेश्वर क्यों बुरी घटनाओं को नहीं रोकता, इसके पीछे एक वजह है। वह वजह बाइबल में बतायी गयी है और इस बारे में हम इस किताब के अध्याय 11 में सीखेंगे। मगर आप इस बात का यकीन रख सकते हैं कि परमेश्वर हमसे प्यार करता है और वह हमारी समस्याओं के लिए ज़िम्मेदार नहीं है। सच तो यह है कि सिर्फ वही हमारी समस्याओं को सुलझा सकता है।—यशायाह 33:2.

10. हम क्यों यकीन रख सकते हैं कि बुरे लोगों ने जो नुकसान किए हैं परमेश्वर उनकी भरपाई ज़रूर करेगा?

10 परमेश्वर पवित्र है। (यशायाह 6:3) वह जो कुछ करता है हमेशा खरा और अच्छा होता है। इसलिए हम परमेश्वर पर पूरा भरोसा कर सकते हैं। मगर इंसान ऐसे नहीं होते, वे अकसर गलत काम करते हैं। और अगर हम मान भी लें कि एक नेता ईमानदार है, फिर भी उसके पास इतनी ताकत नहीं होती कि वह उन सारे नुकसानों की भरपाई कर सके जो बुरे लोगों ने किए हैं। वहीं दूसरी तरफ, परमेश्वर बहुत ताकतवर है। उसके जैसी ताकत किसी के पास नहीं। वह उन सारे नुकसानों की भरपाई कर सकता है और करेगा भी जो बुरे लोगों ने किए हैं। यही नहीं,  वह सभी बुराइयों को हमेशा के लिए मिटा देगा।—भजन 37:9-11 पढ़िए।

लोगों की तकलीफें देखकर परमेश्वर को कैसा लगता है?

11. आपकी तकलीफें परमेश्वर को देखकर कैसा लगता है?

11 दुनिया के हालात और आपकी तकलीफें देखकर परमेश्वर को कैसा लगता है? बाइबल सिखाती है कि परमेश्वर “न्याय से प्यार करता है।” (भजन 37:28) वह नहीं चाहता कि किसी के साथ नाइंसाफी हो। इसलिए जब लोगों के साथ कुछ बुरा होता और वे तकलीफ में होते हैं तो यह देखकर परमेश्वर को दुख होता है। बाइबल बताती है कि पुराने ज़माने में जब उसने धरती पर बुराई को बढ़ते देखा तो “उसका मन बहुत उदास हुआ।” (उत्पत्ति 6:5, 6) परमेश्वर बदला नहीं है। (मलाकी 3:6) बाइबल बताती है कि उसे सचमुच आपकी परवाह है।—1 पतरस 5:7 पढ़िए।

बाइबल सिखाती है कि यहोवा पूरे विश्व का बनानेवाला और प्यार करनेवाला परमेश्वर है

12, 13. (क) दुनिया की दुख-तकलीफें देखकर हमें कैसा लगता है और क्यों? (ख) हम क्यों यकीन रख सकते हैं कि परमेश्वर सारी दुख-तकलीफों और नाइंसाफी को ज़रूर मिटाएगा?

12 बाइबल यह भी बताती है कि परमेश्वर ने हमें उसकी छवि में बनाया है। (उत्पत्ति 1:26) इसका मतलब है कि परमेश्वर में जो अच्छे गुण हैं वही गुण उसने हमारे अंदर भी डाले हैं। इसलिए अगर मासूमों को तड़पता देखकर आपको बुरा लगता है तो सोचिए परमेश्वर को और भी कितना बुरा लगता होगा?

13 परमेश्वर में जो अच्छे गुण हैं उनमें से एक है प्यार। बाइबल सिखाती है कि “परमेश्वर प्यार है।” (1 यूहन्ना 4:8) प्यार ही उसे सबकुछ करने के लिए उभारता है। उसमें प्यार है इसलिए हमारे अंदर भी यह गुण है। ज़रा सोचिए, अगर आपके पास ताकत होती तो क्या आप दुनिया की सारी दुख-तकलीफों और नाइंसाफी को नहीं मिटाते? आप ज़रूर ऐसा करते क्योंकि आप लोगों से प्यार करते हैं। परमेश्वर के बारे में क्या? उसके पास ताकत है और वह हम इंसानों से प्यार भी करता है, इसलिए वह सारी  दुख-तकलीफों और नाइंसाफी को ज़रूर मिटाएगा। आप यकीन रख सकते हैं कि इस किताब की शुरूआत में दिया परमेश्वर का हर वादा ज़रूर पूरा होगा! मगर इन वादों पर विश्वास करने के लिए आपको परमेश्वर के बारे में ज़्यादा जानना होगा।

परमेश्वर चाहता है कि आप उसे जानें

जब आप किसी से दोस्ती करते हैं तो आप सबसे पहले उसे अपना नाम बताते हैं। उसी तरह, परमेश्वर ने बाइबल के ज़रिए हमें अपना नाम बताया है

14. (क) परमेश्वर का नाम क्या है? (ख) हमें क्यों उसका नाम इस्तेमाल करना चाहिए?

14 अगर आप किसी से दोस्ती करना चाहते हैं तो आप सबसे पहले उसे क्या बताते हैं? अपना नाम। तो क्या परमेश्वर का भी एक नाम है? कई धर्मों में सिखाया जाता है कि उसका नाम “ईश्वर” या “प्रभु” है। मगर ये परमेश्वर के नाम नहीं हैं। ये सिर्फ उपाधियाँ हैं, जैसे “राजा” या “प्रधानमंत्री।” परमेश्वर ने हमें बताया है कि उसका नाम “यहोवा” है। भजन 83:18 में लिखा है, “लोग जानें कि सिर्फ तू जिसका नाम यहोवा है, सारी धरती के ऊपर परम-प्रधान है।” बाइबल में परमेश्वर का नाम हज़ारों बार आता है। यहोवा चाहता है कि आप उसका नाम जानें और इस्तेमाल भी करें। उसने आपको अपना नाम इसलिए बताया है कि आप उससे दोस्ती करें।

15. “यहोवा” नाम का क्या मतलब है?

15 परमेश्वर का नाम “यहोवा” गहरा मतलब रखता है। इस नाम का मतलब है कि वह अपना हर वादा पूरा कर सकता है और अपने मकसद  को अंजाम दे सकता है। कोई भी उसे ऐसा करने से नहीं रोक सकता। इस नाम को धारण करने का हक सिर्फ उसी को है। *

16, 17. इन उपाधियों का क्या मतलब है: (क) “सर्वशक्‍तिमान”? (ख) ‘युग-युग का राजा’? (ग) “सृष्टिकर्ता”?

16 हमने देखा कि भजन 83:18 में यहोवा के बारे में लिखा है, “सिर्फ तू . . . परम-प्रधान है।” इसके अलावा, बाइबल में और भी उपाधियाँ हैं जो सिर्फ यहोवा के लिए इस्तेमाल हुई हैं। जैसे प्रकाशितवाक्य 15:3 में  लिखा है, “हे सर्वशक्‍तिमान परमेश्वर यहोवा, तेरे काम कितने महान और लाजवाब हैं। हे युग-युग के राजा, तेरी राहें कितनी नेक और सच्ची हैं।” “सर्वशक्‍तिमान,” इस उपाधि का क्या मतलब है? यही कि यहोवा पूरे विश्व में सबसे शक्‍तिशाली है। उसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता। ‘युग-युग का राजा,’ इस उपाधि का मतलब है कि वही अकेला ऐसा है जिसका अस्तित्व हमेशा से है। भजन 90:2 में लिखा है कि वह हमेशा से रहा है और हमेशा रहेगा। यह क्या ही गज़ब की बात है!

17 यहोवा की एक और उपाधि है, “सृष्टिकर्ता” क्योंकि उसी ने सबकुछ बनाया है। प्रकाशितवाक्य 4:11 में लिखा है, “हे यहोवा, हमारे परमेश्वर, तू महिमा, आदर और शक्‍ति पाने के योग्य है क्योंकि तू ही ने सारी चीज़ें रची हैं और तेरी ही मरज़ी से ये वजूद में आयीं और रची गयीं।” जी हाँ, यहोवा ने ही सारी चीज़ें बनायी हैं, फिर चाहे स्वर्ग में रहनेवाले स्वर्गदूत हों, आसमान के चमकते तारे हों, पेड़ पर लगनेवाले फल हों या फिर समुंदर की मछलियाँ हों।

 क्या आप यहोवा के दोस्त बन सकते हैं?

18. (क) कुछ लोगों को क्यों लगता है कि वे कभी परमेश्वर के दोस्त नहीं बन सकते? (ख) इस बारे में बाइबल क्या कहती है?

18 कुछ लोग जब यहोवा के इन गुणों के बारे में पढ़ते हैं तो वे डर जाते हैं। वे सोचते हैं, ‘परमेश्वर इतना शक्‍तिशाली है, इतना महान है और मुझसे इतना दूर है तो वह भला मेरी परवाह क्यों करेगा?’ मगर क्या परमेश्वर चाहता है कि हम उसके बारे में ऐसा महसूस करें? जी नहीं! यहोवा हमारे करीब रहना चाहता है। बाइबल बताती है कि परमेश्वर “हममें से किसी से भी दूर नहीं है।” (प्रेषितों 17:27) परमेश्वर चाहता है कि आप उसके करीब आएँ और वह वादा करता है कि ‘वह आपके करीब आएगा।’—याकूब 4:8.

19. (क) आप परमेश्वर के दोस्त कैसे बन सकते हैं? (ख) यहोवा का कौन-सा गुण आपको सबसे अच्छे लगा?

19 आप परमेश्वर के दोस्त कैसे बन सकते हैं? यीशु ने कहा, “हमेशा की ज़िंदगी पाने के लिए ज़रूरी है कि वे तुझ एकमात्र सच्चे परमेश्वर को . . . जानें।” (यूहन्ना 17:3) यहोवा के बारे में सीखते रहिए तब आप उसे जान पाएँगे और फिर आपको हमेशा की ज़िंदगी मिलेगी। उदाहरण के लिए, हमने सीखा है कि “परमेश्वर प्यार है।” (1 यूहन्ना 4:16) लेकिन प्यार के अलावा उसके और भी कई बढ़िया गुण हैं। बाइबल बताती है कि यहोवा “दयालु और करुणा से भरा है, क्रोध करने में धीमा और अटल प्यार और सच्चाई से भरपूर है।” (निर्गमन 34:6) यहोवा “भला है और माफ करने को तत्पर रहता है।” (भजन 86:5) वह वफादार है और सब्र से पेश आता है। (2 पतरस 3:9; प्रकाशितवाक्य 15:4) जब आप बाइबल पढ़ेंगे तो आप यहोवा के इन बढ़िया गुणों के बारे में और सीख पाएँगे।

20-22. (क) अगर हम परमेश्वर को देख नहीं सकते तो उसके करीब कैसे आ सकते हैं? (ख) अगर कोई आपको बाइबल पढ़ने से रोके तो आपको क्या करना चाहिए?

20 परमेश्वर को कोई देख नहीं सकता, तो फिर आप उसके करीब कैसे  आ सकते हैं? (यूहन्ना 1:18; 4:24; 1 तीमुथियुस 1:17) जब आप बाइबल में यहोवा के बारे में पढ़ेंगे तो आप जान पाएँगे कि वह कैसा परमेश्वर है, उसमें क्या-क्या गुण हैं। (भजन 27:4; रोमियों 1:20) आप जितना ज़्यादा यहोवा के बारे में सीखेंगे उतना ज़्यादा आप उससे प्यार करने लगेंगे और खुद को उसके करीब महसूस करेंगे।

एक पिता अपने बच्चे से जितना प्यार करता है उससे कहीं ज़्यादा प्यार स्वर्ग में रहनेवाला हमारा पिता हमसे करता है

21 आप जान पाएँगे कि यहोवा हमारा पिता है। (मत्ती 6:9) उसने हमें न सिर्फ ज़िंदगी दी है बल्कि वह चाहता है कि हम एक अच्छी ज़िंदगी जीएँ। एक प्यार करनेवाला पिता अपने बच्चों के लिए यही तो चाहेगा! (भजन 36:9) बाइबल सिखाती है कि आप यहोवा के दोस्त बन सकते हैं। (याकूब 2:23) ज़रा सोचिए, पूरे विश्व का बनानेवाला यहोवा चाहता है कि आप उसके दोस्त बनें!

22 मगर हो सकता है कुछ लोग आपको बाइबल पढ़ने से रोकें। उन्हें डर हो कि आप अपने धर्म की शिक्षाओं को मानना छोड़ देंगे। लेकिन ठान लीजिए कि कोई भी आपको यहोवा का दोस्त बनने से रोकने न पाए क्योंकि उससे अच्छा दोस्त और कोई नहीं हो सकता!

23, 24. (क) आपको क्यों सवाल पूछते रहना चाहिए? (ख) अगले अध्याय में हम क्या चर्चा करेंगे?

23 बाइबल में ऐसी कुछ बातें होंगी जिन्हें समझना आपके लिए मुश्किल होगा। ऐसे में सवाल पूछने से मत झिझकिए। यीशु ने कहा था कि हमें छोटे बच्चों की तरह नम्र होना चाहिए। (मत्ती 18:2-4) और छोटे बच्चे बहुत सारे सवाल पूछते हैं। परमेश्वर चाहता है कि आप भी सवाल पूछें और उनके जवाब पाएँ। इसलिए बाइबल की जाँच कीजिए ताकि आप मालूम कर सकें कि आप जो सीख रहे हैं वह सच है या नहीं।—प्रेषितों 17:11 पढ़िए।

24 यहोवा के बारे में सीखने का सबसे बढ़िया तरीका है, बाइबल की जाँच करना। बाइबल दुनिया की सभी किताबों से एकदम अलग है। किस मायने में? यह हम अगले अध्याय में चर्चा करेंगे।

^ पैरा. 15 अगर आपकी बाइबल में “यहोवा” नाम नहीं है या फिर आप इस नाम के मतलब और उच्चारण के बारे में ज़्यादा जानना चाहते हैं, तो “यहोवा” देखिए।