जब यीशु प्रेषितों को दिखायी दिया तो उसके कुछ समय बाद, पतरस ने फैसला किया कि वह गलील झील में मछली पकड़ने जाएगा। थोमा, याकूब, यूहन्‍ना और दूसरे कुछ चेले भी उसके साथ गए। उन्होंने पूरी रात मछलियाँ पकड़ने की कोशिश की, मगर उन्हें एक भी मछली नहीं मिली।

अगले दिन सुबह-सुबह उन्होंने देखा कि झील किनारे एक आदमी खड़ा है। उस आदमी ने चिल्लाकर उनसे पूछा, ‘क्या तुम्हें मछलियाँ मिलीं?’ उन्होंने कहा, “नहीं!” आदमी ने कहा, “नाव के दायीं तरफ जाल डालो।” जब उन्होंने ऐसा किया तो जाल इतनी सारी मछलियों से भर गया कि वे उसे खींच नहीं पा रहे थे। तब अचानक यूहन्‍ना को एहसास हुआ कि वह आदमी यीशु है। उसने कहा, “यह तो प्रभु है!” यह सुनते ही पतरस पानी में कूद गया और तैरकर किनारे गया। बाकी चेले भी नाव से किनारे गए।

जब वे किनारे पहुँचे तो उन्होंने देखा कि आग पर रोटी और मछलियाँ पक रही हैं।  यीशु ने उनसे कहा कि वे भी खाने के लिए अपनी कुछ मछलियाँ ले आएँ। फिर उसने कहा, “आओ, नाश्‍ता कर लो।”

नाश्‍ते के बाद यीशु ने पतरस से पूछा, ‘क्या तू मछली पकड़ने के काम से ज़्यादा मुझसे प्यार करता है?’ पतरस ने कहा, ‘हाँ प्रभु, तू जानता है कि मैं तुझसे ज़्यादा प्यार करता हूँ।’ यीशु ने कहा, “मेरे मेम्नों को खिला।” यीशु ने फिर पूछा, ‘पतरस, क्या तू मुझसे प्यार करता है?’ पतरस ने कहा, ‘प्रभु, तू जानता है कि मैं तुझसे प्यार करता हूँ।’ यीशु ने कहा, “चरवाहे की तरह मेरी छोटी भेड़ों की देखभाल कर।” यीशु ने तीसरी बार वही सवाल पूछा। तब पतरस दुखी हो गया और उसने कहा, ‘प्रभु, तू सबकुछ जानता है। तू जानता है कि मैं तुझसे प्यार करता हूँ।’ यीशु ने कहा, “मेरी छोटी भेड़ों को खिला।” फिर उसने पतरस से कहा, “मेरे पीछे चलता रह।”

“[यीशु ने] उनसे कहा, ‘मेरे पीछे हो लो और जिस तरह तुम मछलियाँ पकड़ते हो, मैं तुम्हें इंसानों को पकड़नेवाले बनाऊँगा।’ वे फौरन अपने जाल छोड़कर उसके पीछे चल दिए।”—मत्ती 4:19, 20