1-3. (क) गलील सागर में चेलों को किस खतरनाक अनुभव से गुज़रना पड़ा, और यीशु ने वहाँ क्या किया? (ख) यीशु को सही मायनों में ‘मसीह, परमेश्वर की शक्ति’ क्यों कहा गया है?

यीशु के चेले घबरा गए थे। वे अपनी नाव में गलील सागर पार कर रहे थे कि अचानक एक तूफान ने उन्हें आ घेरा। बेशक उन्होंने पहले भी कई तूफान देखे होंगे क्योंकि वे लोग अनुभवी मछुआरे थे। * (मत्ती 4:18, 19) लेकिन यह एक “बड़ी आन्धी” थी जिसकी प्रचण्ड हवाओं ने सागर को मथना शुरू कर दिया था। उन लोगों ने नाव को खेते रहने की जी-तोड़ कोशिश की, मगर तूफान के ज़ोर ने उनके हौसले पस्त कर दिए। उमड़ती लहरें ‘नाव पर यहां तक लग’ रही थीं कि उसमें पानी भरने लगा। इतने शोर-शराबे के बावजूद यीशु नाव के पिछले हिस्से में गहरी नींद सो रहा था। वह पूरा दिन लोगों को सिखाने के बाद बुरी तरह थक चुका था। अपनी जान खतरे में देखकर चेलों ने उसे जगाया और वे उससे बिनती करने लगे: “हे प्रभु, हमें बचा, हम नाश हुए जाते हैं।”—मरकुस 4:35-38; मत्ती 8:23-25.

2 लेकिन यीशु डरा नहीं। पूरे विश्वास के साथ उसने हवा और समुद्र को डाँट लगायी: “शान्त रह, थम जा।” हवा और समुद्र ने तुरन्त उसके आदेश का पालन किया, आँधी रुक गयी और लहरें शांत हो गयीं और “बड़ा चैन हो गया।” लेकिन अब चेलों के मन में एक अजीब-सा डर समाने लगा। वे आपस में कानाफूसी करने लगे, “यह कौन है?” जी हाँ, आखिर वह इंसान कौन हो सकता है जो हवा और समुद्र को इस तरह फटकार लगाए मानो किसी शरारती बच्चे को डाँट रहा हो?—मरकुस 4:39-41; मत्ती 8:26, 27.

3 यीशु कोई साधारण इंसान नहीं था। यहोवा की शक्ति उसके लिए काम करती थी और अद्‌भुत तरीकों से उसके ज़रिए प्रकट होती थी। इसलिए, ईश्वर-प्रेरणा से  प्रेरित पौलुस ने यीशु के बारे में एकदम ठीक कहा कि ‘मसीह, परमेश्वर की शक्ति’ है। (1 कुरिन्थियों 1:24, ईज़ी-टू-रीड वर्शन) यीशु में परमेश्वर की शक्ति कैसे दिखायी देती है? और यीशु जिस तरह अपनी शक्ति इस्तेमाल करता है, उसका हम पर क्या असर हो सकता है?

परमेश्वर के एकलौते पुत्र की शक्ति

4, 5. (क) यहोवा ने अपने एकलौते बेटे को क्या शक्ति और अधिकार दिया था? (ख) जो कुछ बनाने का परमेश्वर का मकसद था, उसे पूरा करने के लिए इस बेटे के पास क्या था?

4 सोचिए, धरती पर आने से पहले स्वर्ग में यीशु के पास कितनी शक्ति रही होगी। यहोवा ने जब अपने इस एकलौते बेटे की सृष्टि की, जो बाद में यीशु मसीह के नाम से जाना गया, तब उसने अपनी “अनन्त शक्ति” का इस्तेमाल किया। (रोमियों 1:20, ईज़ी-टू-रीड वर्शन; कुलुस्सियों 1:15) उसे बनाने के बाद, यहोवा ने अपने पुत्र को अपार शक्ति और अधिकार दिया, ताकि वह उन सारी चीज़ों की सृष्टि कर सके जिन्हें बनाने का परमेश्वर का मकसद था। इस बेटे के बारे में बाइबल कहती है: “सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई।”—यूहन्ना 1:3.

5 यह काम कितना बड़ा था इसका हम शायद ही अंदाज़ा लगा पाएँ। ज़रा कल्पना कीजिए कि लाखों-लाख शक्तिशाली स्वर्गदूतों, विश्व और इसकी अरबों मंदाकिनियों और इस धरती के साथ इसके हज़ारों किस्म के जीव-जन्तुओं को बनाने के लिए कितनी शक्ति की ज़रूरत पड़ी होगी। इस काम को पूरा करने के लिए परमेश्वर के एकलौते बेटे के पास पूरे जहान की सबसे शक्तिशाली ताकत यानी परमेश्वर की पवित्र आत्मा थी। परमेश्वर के लिए एक कारीगर की तरह काम करने में यह बेटा बहुत खुश था। जी हाँ, यहोवा ने दूसरी सब वस्तुओं की सृष्टि करने के लिए इसी बेटे को इस्तेमाल किया।—नीतिवचन 8:22-31.

6. यीशु की मौत और पुनरुत्थान के बाद, उसे क्या शक्ति और अधिकार सौंपा गया?

6 क्या यह एकलौता बेटा और भी ज़्यादा शक्ति और अधिकार हासिल कर सकता था? अपनी मौत और पुनरुत्थान के बाद, यीशु ने यह कहा था: “स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है।” (मत्ती 28:18) जी हाँ, यीशु को सारे जहान पर अधिकार चलाने के काबिल किया गया और इसका हक दिया गया। वह “राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु” है, इसलिए उसे यह अधिकार दिया गया है कि वह देखी और अनदेखी ऐसी ‘सारी प्रधानता और सारे अधिकार और सामर्थ  का अंत करे,’ जो उसके पिता के खिलाफ खड़े हों। (प्रकाशितवाक्य 19:16; 1 कुरिन्थियों 15:24-26) यहोवा परमेश्वर ने अपने आप को छोड़कर बाकी सबकुछ यीशु के अधीन कर दिया है, “उस ने कुछ भी रख न छोड़ा, जो उसके आधीन न हो।”—इब्रानियों 2:8; 1 कुरिन्थियों 15:27.

7. हम क्यों यकीन रख सकते हैं कि जो शक्ति यहोवा ने यीशु को दी है, वह उसका कभी-भी गलत इस्तेमाल नहीं करेगा?

7 क्या हमें यह चिंता करनी चाहिए कि यीशु ने भविष्य में अपनी शक्ति का गलत इस्तेमाल किया तो क्या होगा? यह नामुमकिन है! यीशु अपने पिता से सच्चा प्यार करता है और वह कभी-भी ऐसा काम नहीं करेगा जिससे उसके पिता के दिल को ठेस पहुँचे। (यूहन्ना 8:29; 14:31) यीशु यह अच्छी तरह जानता है कि यहोवा कभी-भी अपनी अपार शक्ति का गलत इस्तेमाल नहीं करता। वह खुद इस बात का गवाह रहा है कि यहोवा उन लोगों की खातिर ‘अपना सामर्थ दिखाने’ के मौके ढूँढ़ता है, “जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है।” (2 इतिहास 16:9) बेशक, यीशु भी इंसानों से उतना ही प्यार करता है जितना उसका पिता, इसलिए हम यकीन रख सकते हैं कि वह अपनी शक्ति का इस्तेमाल हमेशा भलाई के लिए करेगा। (यूहन्ना 13:1) यीशु ने इस मामले में एक बेदाग रिकॉर्ड कायम किया है। आइए देखें कि ज़मीन पर रहते वक्‍त उसके पास क्या शक्ति थी और वह किस तरह उसका इस्तेमाल करने को प्रेरित हुआ।

‘वचन का शक्‍तिशाली’

8. अभिषिक्त किए जाने के बाद यीशु को क्या करने की शक्ति दी गयी, और उसने इसका कैसे इस्तेमाल किया?

8 जब यीशु बालक ही था और नासरत में बड़ा हो रहा था, तब उसने कोई भी चमत्कार नहीं किया। लेकिन सा.यु. 29 में जब करीब 30 साल की उम्र में उसने बपतिस्मा लिया तब एक बदलाव आया। (लूका 3:21-23) बाइबल बताती है: “परमेश्वर ने . . . यीशु नासरी को पवित्र आत्मा और सामर्थ से अभिषेक किया: वह भलाई करता, और सब को जो शैतान के सताए हुए थे, अच्छा करता फिरा।” (प्रेरितों 10:38) ‘वह भलाई करता फिरा,’ क्या इन शब्दों से पता नहीं चलता कि यीशु ने अपनी शक्ति का सही तरीके से इस्तेमाल किया? बेशक! अभिषिक्त किए जाने के बाद वह ‘कर्म और वचन का शक्‍तिशाली नबी’ बना।—लूका 24:19, बुल्के बाइबिल।

9-11. (क) यीशु ज़्यादातर कैसी जगहों पर सिखाता था और उसके सामने क्या चुनौती थी? (ख) यीशु के सिखाने के तरीके से भीड़ क्यों चकित हो जाती थी?

 9 यीशु वचन का शक्तिशाली कैसे था? उसने ज़्यादातर खुली जगहों या मैदानों में सिखाया जैसे झील के किनारे और पहाड़ियों के पास, साथ ही सड़कों पर और बाज़ारों में। (मरकुस 6:53-56; लूका 5:1-3; 13:26) अगर उसकी बातें दिलचस्प ना होतीं तो उसके सुननेवाले वहाँ से चलते बनते। उस ज़माने में जब किताबें बनाने के लिए छापेखाने नहीं थे, यीशु की बातों की कदर करनेवालों को अपने दिल और दिमाग में उसके वचनों को उतार लेने की ज़रूरत थी। इसलिए ज़रूरी था कि यीशु की शिक्षाएँ बेहद दिलचस्प हों, आसानी से समझ में आएँ और याद रह जाएँ। लेकिन, यीशु के लिए यह कोई मुश्किल काम नहीं था। उसके पहाड़ी उपदेश की ही मिसाल लीजिए।

10 सामान्य युग 31 की शुरूआत में एक दिन सुबह-सुबह, गलील सागर के पास के पहाड़ी इलाके में भीड़ जमा हुई। उनमें से कुछ लोग, करीब 100 से 110 किलोमीटर की दूरी तय करके यहूदिया और यरूशलेम से आए थे। दूसरे, उत्तर में सोर और सिदोन के समुद्र-तट के इलाके से आए थे। बहुत-से बीमार लोग, यीशु के करीब आकर उसे छूना चाहते थे और उसने उन सभी को चंगा किया। जब भीड़ में ऐसा कोई न बचा, जो सख्त बीमार हो तब यीशु ने सिखाना शुरू किया। (लूका 6:17-19) जब कुछ देर बाद यीशु ने अपनी बात खत्म की, तब लोग उसकी बातें सुनकर हैरान रह गए। क्यों?

11 इस पहाड़ी उपदेश को सुननेवाले एक आदमी ने बरसों बाद लिखा: “भीड़ उसके उपदेश से चकित हुई। क्योंकि वह . . . अधिकारी की नाईं उन्हें उपदेश देता था।” (मत्ती 7:28, 29) यीशु के बोलने में ऐसी शक्ति थी जिसे वे महसूस कर सकते थे। वह परमेश्वर की तरफ से बोलता था और उसके वचन को अधिकार की तरह इस्तेमाल करके सिखाता था। (यूहन्ना 7:16) यीशु की कही हर बात साफ और स्पष्ट होती थी, उसके उपदेश कायल कर देनेवाले थे, उसकी दलीलें लाजवाब और ऐसी थीं जिन्हें कोई काट नहीं सकता था। वह मुद्दे की जड़ तक पहुँचता था और उसके शब्द सुननेवालों के दिलों में उतर जाते थे। उसने सिखाया कि खुशी कैसे पायी जा सकती है, प्रार्थना कैसे की जानी चाहिए, परमेश्वर के राज्य की खोज  कैसे की जानी चाहिए और अच्छे भविष्य के लिए कैसे काम करने चाहिए। (मत्ती 5:3–7:27) उसके शब्दों ने सच्चाई और धार्मिकता के भूखे लोगों के दिलों में जागृति पैदा की। ऐसे लोग अपना “इन्कार” करके और सबकुछ छोड़कर यीशु के पीछे चलने को तैयार थे। (मत्ती 16:24; लूका 5:10, 11) यीशु के वचनों की शक्ति का यह क्या ही बढ़िया सबूत था!

‘कर्म का शक्‍तिशाली’

12, 13. किस अर्थ में यीशु ‘कर्म का शक्‍तिशाली’ था, और उसने किन अलग-अलग तरीकों से चमत्कार किए?

12 यीशु ‘कर्म का शक्‍तिशाली’ भी था। (लूका 24:19, बुल्के बाइबिल) सुसमाचार की किताबों में, यीशु के 30 से ज़्यादा ऐसे खास चमत्कारों का ब्यौरा दिया गया है, जो उसने ‘यहोवा की सामर्थ’ से किए। * (लूका 5:17) यीशु के चमत्कारों का असर हज़ारों ज़िंदगियों पर पड़ा। यीशु ने एक बार “स्त्रियों और बालकों” के अलावा 5,000 पुरुषों और दूसरी बार 4,000 पुरुषों को खाना खिलाया। सिर्फ दो चमत्कारों में, कुल मिलाकर 20,000 के करीब लोग थे!—मत्ती 14:13-21; 15:32-38.

“उन्हों ने यीशु को झील पर चलते . . . देखा”

13 यीशु ने तरह-तरह के चमत्कार किए। वह बिना किसी मुश्किल के दुष्टात्माओं को निकाल देता था, क्योंकि उसका उन पर अधिकार था। (लूका 9:37-43) धरती के तत्त्वों पर भी उसे शक्ति थी, उसने एक बार पानी को दाखमधु बना दिया। (यूहन्ना 2:1-11) उसके चेलों के अचरज की सीमा न रही जब उन्होंने एक बार यीशु को गलील के तूफानी सागर में पानी पर चलते देखा। (यूहन्ना 6:18, 19) बीमारियों को ठीक करने का उसे अधिकार था, बिगड़े हुए रोग-ग्रस्त अंगों को, पुरानी और जानलेवा बीमारियों को भी उसने ठीक किया। (मरकुस 3:1-5; यूहन्ना 4:46-54) यीशु ने ये चंगाई के काम अलग-अलग तरह से किए थे। कुछ ऐसे भी लोग थे जिन्हें यीशु ने बहुत दूर से ठीक किया, जबकि दूसरों को उसने छूकर ठीक किया। (मत्ती 8:2, 3, 5-13) कइयों की बीमारी फौरन ठीक हो गयी, तो कुछ धीरे-धीरे चंगे हुए।—मरकुस 8:22-25; लूका 8:43, 44.

14. किन हालात में यीशु ने दिखाया कि उसके पास मौत को मिटाने की शक्ति थी?

 14 सबसे अनोखी बात यह है कि यीशु के पास मुरदों को ज़िंदा करने की शक्ति थी। तीन ऐसे अवसरों का रिकॉर्ड दर्ज़ है जब उसने मरे हुओं को ज़िंदा किया। उसने एक बारह साल की लड़की को जिलाकर उसके माता-पिता को सौंप दिया, एक विधवा माँ के एकलौते बेटे को और दो बहनों के प्यारे भाई को मौत की नींद से जगाया। (लूका 7:11-15; 8:49-56; यूहन्ना 11:38-44) इनमें से कोई हालात ऐसे नहीं थे, जिनका सामना करना यीशु के लिए बहुत मुश्किल रहा हो। बारह साल की लड़की को उसकी मौत के कुछ ही समय बाद यीशु ने जी उठाया। विधवा का बेटा जिस दिन मरा था उसी दिन उसकी अर्थी से उसे ज़िंदा किया। और लाजर को मरे हुए चार दिन हो चुके थे जब उसने उसकी कब्र पर पहुँचकर उसे ज़िंदा किया।

निःस्वार्थ, ज़िम्मेदाराना तरीके से और दूसरों का लिहाज़ करते हुए शक्ति का इस्तेमाल

15, 16. क्या सबूत दिखाते हैं कि यीशु ने अपनी शक्ति का इस्तेमाल निःस्वार्थ भावना से किया?

15 कल्पना कीजिए कि अगर यीशु की शक्ति किसी असिद्ध इंसानी शासक के हाथ आ जाती, तो वह इसका कितना गलत इस्तेमाल कर सकता था। मगर यीशु निष्पाप था। (1 पतरस 2:22) उसने स्वार्थ, ऊँचा उठने की लालसा और लोभ को खुद पर हावी नहीं होने दिया, जबकि इन्हीं कारणों से असिद्ध इंसान दूसरों को नुकसान पहुँचाने के लिए अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हैं।

16 यीशु ने अपनी शक्ति का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए नहीं, बल्कि निःस्वार्थ भाव से दूसरों की भलाई के लिए किया। जब वह भूखा था, तब उसने अपनी भूख मिटाने के लिए पत्थरों को रोटी नहीं बनाया। (मत्ती 4:1-4) संपत्ति के नाम पर यीशु के पास कुछ नहीं था, यही इस बात का सबूत है कि उसने अपनी शक्ति का इस्तेमाल धन बटोरने के लिए नहीं किया। (मत्ती 8:20) वह निःस्वार्थ भाव से शक्तिशाली काम करता था, इसका एक और सबूत है। जब वह चमत्कार करता था, तो इसके लिए खुद उसे कुछ कीमत चुकानी पड़ती थी। जब वह बीमारों को चंगा करता था, तो उसकी शक्ति खर्च होती थी। सिर्फ एक इंसान के चंगा होने के लिए भी, यीशु अपने शरीर से शक्ति निकलते हुए महसूस करता था। (मरकुस 5:25-34) फिर भी, उसने भीड़-की-भीड़ को उसे छूने दिया और वे सब चंगे हुए। (लूका 6:19) निःस्वार्थ भावना की क्या ही बेहतरीन मिसाल!

17. यीशु ने कैसे दिखाया कि वह अपनी शक्ति का इस्तेमाल ज़िम्मेदाराना तरीके से करता था?

 17 यीशु ने बहुत ज़िम्मेदाराना तरीके से अपनी शक्ति का इस्तेमाल किया। उसने कभी-भी खेल-तमाशे के लिए या दूसरों को यह दिखाने के लिए चमत्कार नहीं किए कि वह कैसे-कैसे कारनामे कर सकता है। (मत्ती 4:5-7) हेरोदेस सिर्फ अपना मन बहलाने के लिए यीशु के चमत्कार देखने को बेताब था, मगर यीशु ने उसकी इस गलत ख्वाहिश को पूरा नहीं किया। (लूका 23:8, 9) यीशु अपनी शक्ति का ढिंढोरा पीटने के बजाय, बीमारियों से ठीक होनेवालों को आदेश देता था कि वे किसी से कुछ न कहें। (मरकुस 5:43; 7:36) वह नहीं चाहता था कि मिर्च-मसाला लगाकर उसके बारे में खबरें फैलायी जाएँ और लोग ऐसी खबरों के आधार पर उसके बारे में राय कायम करें।—मत्ती 12:15-19.

18-20. (क) यीशु क्या देखकर अपनी शक्ति का इस्तेमाल करता था? (ख) यीशु ने एक बहरे आदमी को जिस तरीके से चंगा किया, उसके बारे में आप कैसा महसूस करते हैं?

18 यह शक्तिशाली इंसान यीशु, उन हुक्मरानों के जैसा बिलकुल भी नहीं था, जो दूसरों की ज़रूरतों और तकलीफ की परवाह किए बगैर अपनी शक्ति का ज़ोर आज़माते थे। यीशु लोगों की परवाह करता था। दीन-दुखियों पर नज़र पड़ते ही उसका दिल इस कदर भर आता था कि वह उनकी तकलीफ को दूर किए बिना नहीं रह सकता था। (मत्ती 14:14) वह उनकी भावनाओं और ज़रूरतों को समझता था, और इसी गहरी परवाह की वजह से वह अपनी शक्ति का इस्तेमाल करता था। मरकुस 7:31-37 में इसकी एक दिल छू लेनेवाली मिसाल दर्ज़ है।

19 इस मौके पर, भीड़-की-भीड़ ने यीशु को ढूँढ़ निकाला और वे उसके पास बहुत-से बीमारों को ले आए, और उसने उन सभी को ठीक किया। (मत्ती 15:29, 30) मगर यीशु ने एक आदमी पर खास ध्यान दिया। यह आदमी बहरा था और बोल नहीं पाता था। यीशु ने जान लिया कि वह भीड़ में बहुत घबरा रहा है। लिहाज़ दिखाते हुए, यीशु उस आदमी को भीड़ से अलग एकांत में ले गया। फिर यीशु ने इशारों से बताया कि वह उसके लिए क्या करने जा रहा है। उसने “अपनी उंगलियां उसके कानों में डालीं, और थूक कर उस की जीभ को छूआ।” * (मरकुस  7:33) उसके बाद, यीशु ने स्वर्ग की ओर देखा और प्रार्थना करते हुए एक आह भरी। यीशु के ये काम उस आदमी से कह रहे थे कि ‘मैं अब जो तुम्हारे लिए करने जा रहा हूँ वह परमेश्वर की शक्ति से होगा।’ आखिर में, यीशु ने कहा: “खुल जा।” (मरकुस 7:34) ऐसा करने पर, उस आदमी की सुनने की शक्ति लौट आयी और वह साफ-साफ बोलने भी लगा।

20 यह बात दिल को छू लेती है कि जब यीशु ने परमेश्वर से मिली शक्ति से बीमारों को चंगा किया तब उसने दुखियारों की भावनाओं का लिहाज़ किया और हमदर्दी दिखायी! क्या इससे हमें दिलासा नहीं मिलता कि यहोवा ने मसीहाई राज्य की बागडोर ऐसे दयालु, दूसरों का लिहाज़ करनेवाले शासक के हाथों में सौंपी है?

आनेवाली चीज़ों की निशानी

21, 22. (क) यीशु के चमत्कार, भविष्य में आनेवाली किन चीज़ों की निशानी थे? (ख) प्राकृतिक शक्तियाँ यीशु के काबू में हैं, इसलिए हम उसके राज्य में क्या उम्मीद कर सकते हैं?

21 इस धरती पर यीशु के शक्तिशाली काम, उसके राज्य में मिलनेवाली और भी शानदार आशीषों की सिर्फ एक झलक थे। परमेश्वर की नयी दुनिया में, यीशु एक बार फिर चमत्कार करेगा और इस बार सारी धरती पर ये चमत्कार होंगे! आइए भविष्य में मिलनेवाली उन लाजवाब आशीषों पर गौर करें।

22 यीशु धरती के पर्यावरण को पूरी तरह फिर से संतुलन में लाएगा। याद कीजिए, उसने एक तूफान को शांत करके दिखाया कि प्रकृति की शक्तियाँ उसके काबू में हैं। तो फिर, कोई शक नहीं कि मसीह के राज्य में इंसानों को बवंडरों, भूकंपों, ज्वालामुखियों के फटने या दूसरी प्राकृतिक विपत्तियों के कहर से डरने की ज़रूरत नहीं होगी। यहोवा ने यीशु को एक कुशल कारीगर की तरह इस्तेमाल करके, धरती और उसके तमाम जीवों की रचना की थी, इसलिए यीशु इस धरती की बनावट को बहुत अच्छी तरह जानता है। वह जानता है कि इस धरती के साधनों का सही इस्तेमाल कैसे किया जाना चाहिए। उसके राज्य में, सारी धरती फिरदौस बन जाएगी।

23. एक राजा की हैसियत से यीशु, इंसानों की ज़रूरतें कैसे पूरी करेगा?

23 इंसानों की ज़रूरतों के बारे में क्या? यीशु ने थोड़े-से खाने से हज़ारों लोगों को भरपेट खिलाया, इससे हमें यकीन होता है कि उसके राज्य में कोई भी भूखा नहीं  होगा। जी हाँ, ढेर सारा भोजन सबको बराबर बाँटा जाएगा और इससे भूख सदा के लिए खत्म हो जाएगी। (भजन 72:16) बीमारियाँ और रोग जिस कदर उसके काबू में थे, उससे पता चलता है कि बीमार, अंधे, बहरे, लूले-लंगड़े और अपाहिजों को सदा के लिए और पूरी तरह से चंगा कर दिया जाएगा। (यशायाह 33:24; 35:5, 6) वह शक्तिशाली स्वर्गीय राजा है, और मरे हुओं का पुनरुत्थान करने की उसकी काबिलीयत इस बात की गारंटी है कि वह ऐसे लाखों लोगों का पुनरुत्थान करेगा जो उसके पिता की याददाश्त में हैं।—यूहन्ना 5:28, 29.

24. जब हम यीशु की शक्ति के बारे में सोचते हैं, तो हमें हमेशा क्या बात याद रखनी चाहिए, और क्यों?

24 जब हम यीशु की शक्ति के बारे में सोचते हैं, तो आइए हम यह बात हमेशा याद रखें कि यह बेटा हू-ब-हू अपने पिता की तरह काम करता है। (यूहन्ना 14:9) तो फिर, यीशु जिस तरह शक्ति का इस्तेमाल करता है उससे हमें साफ समझ आता है कि यहोवा अपनी शक्ति कैसे इस्तेमाल करता है। मिसाल के लिए, सोचिए कि किस कोमलता से यीशु ने एक कोढ़ी को चंगा किया। तरस खाकर, यीशु ने उस आदमी को छुआ और कहा: “मैं चाहता हूं।” (मरकुस 1:40-42) ऐसे वृत्तांतों के ज़रिए दरअसल यहोवा कह रहा है, ‘मैं इसी तरह अपनी शक्‍ति इस्तेमाल करता हूँ!’ क्या आपका दिल, हमारे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की महिमा करने और उसका धन्यवाद करने को उमड़ नहीं पड़ता कि वह इतने प्यार भरे तरीके से अपनी शक्ति का इस्तेमाल करता है?

^ पैरा. 1 गलील सागर (या, झील) में तूफानों का अचानक उठना आम बात है। यह झील समुद्र तल से (करीब 200 मीटर) नीचाई पर है, इसलिए आस-पास के इलाकों की तुलना में यहाँ की हवा ज़्यादा गर्म होती है और इससे वायुमंडल में हलचल पैदा होती रहती है। उत्तर दिशा में हर्मोन पहाड़ से तेज़ हवाएँ यरदन घाटी में आती हैं। और इससे सागर के शांत वातावरण में अचानक ज़बरदस्त बदलाव आते देर नहीं लगती।

^ पैरा. 12 इसके अलावा, कई बार सुसमाचार की किताबों में बहुत-से चमत्कारों का वर्णन एक ही बार मोटे तौर पर किया गया है। मिसाल के लिए, एक बार “सारा नगर” यीशु को देखने आया और उसने “बहुतों को” चंगा किया।—मरकुस 1:32-34.

^ पैरा. 19 यहूदियों और अन्यजातियों, दोनों में थूकना चंगा करने का एक ज़रिया या निशानी मानी जाती थी और रब्बियों के लेखनों में थूक इस्तेमाल करके इलाज करने के बारे में बताया गया है। यीशु ने, सिर्फ उस आदमी को यह बताने के लिए थूका होगा कि वह अब चंगा होनेवाला है। जो भी हो, एक बात पक्की है कि यीशु अपने थूक को चंगाई करने की कुदरती दवा के तौर पर इस्तेमाल नहीं कर रहा था।