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यहोवा के साक्षी

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डाटा को सुरक्षित रखने की नीति

डाटा को सुरक्षित रखने की नीति

बाइबल में बताए सिद्धांतों के आधार पर यहोवा के साक्षियों का संगठन, अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखने के लोगों के हक को मानता है। यहोवा के साक्षियों की ज़रूरतें पूरी करने के लिए और उनके धार्मिक और दान-धर्म के कामों का खर्च उठाने के लिए ज़रूरी है कि संगठन के पास लोगों की निजी और गोपनीय जानकारी हो ताकि उनके साथ खुलकर संचार हो सके। मगर संगठन इस बात को भी समझता है कि जानकारी की सुरक्षा और गोपनीयता बनाए रखना ज़रूरी है। (नीतिवचन 15:22; 25:9) इस बात का खास ध्यान रखा जाता है कि जानकारी गुप्त रहे।—नीतिवचन 20:19.

लोगों की निजी जानकारी को गोपनीय रखने के लिए कई देशों ने डाटा को सुरक्षित रखने के लिए कानून बनाए हैं। इन कानूनों के बनने से बहुत पहले ही यहोवा के साक्षियों के संगठन का यह इतिहास रहा है कि वह किसी भी व्यक्‍ति की निजी जानकारी दूसरों को नहीं बाँटता बल्कि उसे गुप्त रखता है। यहोवा के साक्षियों का संगठन आगे भी इसी नमूने पर चलता रहेगा, जैसा कि आगे इस नीति में बताया गया है।

यह नीति कहाँ-कहाँ लागू होती है

यह नीति यहोवा के साक्षियों के पूरे संगठन के लिए बनायी गयी है और दुनिया-भर में उनके सभी शाखा दफ्तरों पर लागू होती है।

डाटा सुरक्षा

यहोवा के साक्षियों का संगठन लोगों की निजी जानकारी आगे दिए सिद्धांतों को ध्यान में रखकर इस्तेमाल करता है:

  1. निजी जानकारी सही और कानूनी तरीके से इस्तेमाल की जाएगी।

  2. सिर्फ उतनी निजी जानकारी इकट्ठी और इस्तेमाल की जाएगी जितनी यहोवा के साक्षियों के धार्मिक और दान-धर्म के कामों के लिए ज़रूरी है।

  3. निजी जानकारी एकदम सटीक और ताज़ा-तरीन रखी जाएगी। अगर संगठन को पता चलता है कि कोई जानकारी गलत है तो उसे जल्द-से-जल्द ठीक किया जाएगा।

  4. निजी जानकारी को सिर्फ तब तक रखा जाएगा जब तक कि संगठन का जायज़ काम पूरा नहीं हो जाता।

  5. निजी जानकारी देनेवालों के हक का पूरा मान रखा जाएगा।

  6. निजी जानकारी का गलत या गैर-कानूनी तरीके से इस्तेमाल न हो, इसके लिए तकनीकी और संगठनात्मक कदम उठाए जाएँगे। कंप्यूटर में दर्ज़ निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए पासवर्ड डाला जाता है और पासवर्ड सिर्फ उन्हें पता होता है जिन्हें जानकारी इस्तेमाल करने का अधिकार है। काम के बाद ऑफिस बंद कर दिए जाते हैं और सिर्फ अधिकार रखनेवाले व्यक्‍ति को ही अंदर आने दिया जाता है।

  7. एक शाखा दफ्तर दूसरे शाखा दफ्तर को तब तक किसी व्यक्‍ति की निजी जानकारी नहीं देगा, जब तक कि यहोवा के साक्षियों के संगठन के धार्मिक और दान-धर्म के उद्देश्‍यों को पूरा करने के लिए, जिसके लिए हर यहोवा के साक्षी ने यहोवा का साक्षी बनते वक्‍त अपनी मरज़ी और इच्छा से हामी भरी थी, यह ज़रूरी न हो।

निजी जानकारी देनेवाला का हक

  1. व्यक्‍तिगत और गोपनीय डाटा की सुरक्षा और इसमें फेरबदल करने या इसे मिटाने की एक व्यक्‍ति के हक को, इस नीति में बताए गए यहोवा के साक्षियों के सिद्धांतों के तहत माना जाएगा।

  2. जो इस अनुभाग के तहत कोई गुज़ारिश करता है उसे अपनी पहचान के पर्याप्त सबूत पेश करने होंगे।

  3. अगर कोई अपनी निजी या गोपनीय जानकारी देखना चाहता है या उसमें फेरबदल करना चाहता है या उसे मिटाना चाहता है तो इसकी इजाज़त संगठन, एक व्यक्‍ति की जानकारी पाने, उसमें फेरबदल करने और उसे मिटाने की इच्छा और संगठन के धार्मिक हितों को जिसमें संगठन के धार्मिक स्वतंत्रता और अभ्यास का हक शामिल है, को ध्यान में रखते हुए देगा।

  4. यहोवा के साक्षी के तौर पर एक व्यक्‍ति के बारे में जानकारी स्थायी रूप से रखना संगठन के हित में है। ऐसी जानकारी को मिटाना संगठन के धार्मिक विश्‍वासों और प्रथाओं का उल्लंघन होगा।

अपील करने का हक

अगर किसी को लगता है कि उसका हक मारा गया है तो वह शाखा दफ्तर को एक खत लिखकर इस बारे में बता सकता है। जो घटना अपील का आधार है उसके दो हफ्ते के अंदर-अंदर एक व्यक्‍ति को यह खत भेजना चाहिए।